इन दिनों विवाह की शहनाइयां गूंज रही हैं और लोग मांगलिक कार्यों के उल्लास में डूबे हैं, लेकिन यह रौनक जल्द ही थमने वाली है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में लगभग तीन वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर ‘मलमास’ या ‘अधिक मास’ का आगमन हो रहा है। देवघर के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी शुभ कार्यों पर पूर्णतः रोक लग जाती है। धर्मशास्त्रों में मलमास को केवल ईष्ट देव की आराधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक शांति के लिए श्रेष्ठ माना गया है, जबकि सांसारिक मांगलिक कार्यों के लिए यह समय वर्जित होता है। मलमास के शुरू होते ही शादियों का वर्तमान शोर थम जाएगा और श्रद्धालु भक्ति-भाव में लीन हो जाएंगे।
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि अगर आप शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ इत्यादि जैसे मांगलिक कार्य करना चाहते है तो 15 मई से पहले कर लें, नहीं तों फिर लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है। दराअसल इस साल मलमास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है। यह पूरे एक महीने तक यानी 15 जून तक चलेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे शादी, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश करना शुभ नहीं माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस अवधि में लोग इन कार्यों से दूरी बनाकर रखते हैं और जैसे ही मलमास समाप्त होता है, 17 जून से फिर से शादियों और शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
मलमास में जरूर करें यह कार्य
हालांकि मलमास के दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक जरूर होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह समय पूरी तरह से निष्क्रिय होता है। इस महीने में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, कथा-श्रवण और भगवान की आराधना करना बहुत शुभ माना जाता है। लोग इस समय को आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति के लिए उपयोग करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
मलेमास में क्यों नहीं करते मांगलिक कार्य:
अब बात करते हैं कि आखिर मलमास में मांगलिक कार्य क्यों नहीं किए जाते हैं। दरअसल, हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास तब लगता है जब सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाने की जरूरत होती है। इस महीने का कोई निश्चित देवता या शुभ ग्रह का प्रभाव नहीं माना जाता, इसलिए इसे मांगलिक कार्यों के लिए उचित नहीं समझा जाता। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल पूरी तरह से प्राप्त नहीं होता है। यही कारण है कि लोग इस दौरान शादी-विवाह जैसे बड़े निर्णयों को टाल देते हैं और केवल धार्मिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इस तरह, मलमास एक ऐसा समय होता है जब बाहरी खुशियों की जगह लोग आंतरिक शांति और भक्ति की ओर ध्यान देते हैं। जैसे ही यह अवधि समाप्त होती है, एक बार फिर से शहनाइयों की गूंज शुरू हो जाती है और जीवन में उत्सव का रंग लौट आता है।
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