शनि अमावस्या का अर्थ है शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या। इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। साल की पहली शनि अमावस्या ज्येष्ठ माह में पड़ेगी। इस शनि अमावस्या पर 5 शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन व्रत और शनिदेव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। जिन लोगोंं की राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उनको शनि अमावस्या पर स्नान, दान, व्रत और पूजा जरूर करनी चाहिए। शनि अमावस्या का संयोग साल में एक या दो बार ही बनता है। आइए जनते हैं कि साल की पहली शनि अमावस्या कब है? शनि अमावस्या का मुहूर्त, शुभ संयोग क्या हैं?
शनि अमावस्या 2026 तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ हो रही है और यह 17 मई को 01 बजकर 30 ए एम तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर साल की पहली शनि अमावस्या 16 मई शनिवार को है।
5 शुभ संयोग में शनि अमावस्या
साल की पहली शनि अमावस्या पर 5 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिसकी वजह से यह दिन और भी पुण्य फलदायी हो गई है।
* सबसे बड़ा संयोग यह है कि शनि अमावस्या के दिन ही शनि जयंती या शनि जन्मोत्सव है।
* यह शनि अमावस्या ज्येष्ठ की अमावस्या पर पड़ रही है। इस दिन दर्श अमावस्या भी है।
* शनि अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत का भी शुभ संयोग बन रहा है, जो अखंड सौभाग्य का प्रतीक है।
* शनि अमावस्या के दिन सौभाग्य योग बन रहा है, जो प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। यह योग सौभाग्य को बढ़ाने वाला होता है।
* शनि अमावस्या पर सुबह 10 बजकर 26 मिनट से शोभन योग बनेगा, जो पूरी रात तक रहेगा। यह एक शुभ योग है, जिसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं।
शनि अमावस्या 2026 मुहूर्त
शनि अमावस्या पर सूर्योदय का समय 05:30 ए एम पर है। उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:07 ए एम से 04:48 ए एम तक रहेगा और अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:50 ए एम से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है। सुबह में आप स्नान आदि से निवृत होकर शनिदेव की पूजा करें। शमी के पेड़ की सेवा करें और पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें। इस दिन शनिदेव की पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 07 बजकर 19 मिनट से सुबह 08 बजकर 59 मिनट तक है।
शनि अमावस्या का महत्व
शनि अमावस्या के दिन व्रत, पूजा, पाठ, स्नान और दान से व्यक्ति शनिदेव को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। इस दिन अपने पितरों के लिए भी तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि करता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस बार की शनि अमावस्या पर शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बना है। इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए। शनि की पीड़ा और दुष्प्रभावों से बचने के लिए ज्योतिष उपायों को कर सकते हैं। अपने जन्मदिवस पर खुश होकर शनिदेव आपका कल्याण कर सकते हैं।
Trending
- भीषण गर्मी में काल बनी नदी, डूबने से दो मासूमों की मौत; गांव में छाया सन्नाटा
- रायपुर में IPL का महासंग्राम: 10 और 13 मई को भिड़ेंगी दिग्गज टीमें, कल से खुल रहा है ‘टिकट विंडो’
- शनि जयंती और शनि अमावस्या का महासंयोग: 16 मई को बरसेंगी खुशियां, जानें 5 शुभ संयोग और मुहूर्त
- दिल्ली कैपिटल्स ने जीतकर अंक तालिका में लगाई छलांग, कहां पहुंची राजस्थान रॉयल्स? जानिए
- बॉक्स ऑफिस पर ‘राजा शिवाजी’ का धमाका: रितेश देशमुख की फिल्म ने पहले दिन की रिकॉर्ड तोड़ कमाई
- सावधान! तरबूज के साथ इन 4 चीजों का मेल बन सकता है ‘स्लो पॉइजन’, मुंबई की घटना ने दहलाया देश
- भारतमाला मुआवजा घोटाला: अब हर खसरा नंबर की होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ईडी के खुलासे के बाद दो नई जांच टीमें गठित
- बिलासपुर जोन: यात्रियों की बढ़ी मुसीबत, गोंदिया में निर्माण कार्य के चलते 18 ट्रेनें रद्द


