ज्येष्ठ माह हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है। ज्येष्ठ में सूर्य की तपिश बढ़ जाती है। ज्येष्ठ में नौतपा भी होता है, जिसमें भीषण गर्मी पड़ती है। इस समय में हर प्राणी के लिए जल और छांव प्रिय होते हैं। ज्येष्ठ माह का प्रारंभ ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा तिथि से होता है और इसका समापन ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि को होता है। ज्येष्ठ माह में स्नान, दान, पूजा, पाठ करने का विशेष महत्व है। इसमें आप एक आसान काम करके सबसे बड़ा पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं और आपको मृत्यु के बाद नरक नहीं जाना पड़ेगा। आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ माह कब से शुरू है? ज्येष्ठ माह में कौन सा उपाय करना चाहिए?
ज्येष्ठ माह 2026 का प्रारंभ
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 मई शुक्रवार को रात 10 बजकर 52 मिनट से शुरू हो रही है। यह तिथि 3 मई रविवार को 12:49 ए एम पर खत्म हो रही है। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर ज्येष्ठ माह का प्रारंभ 2 मई शनिवार से हो रहा है।
व्यतिपात योग और विशाखा नक्षत्र में ज्येष्ठ का प्रारंभ
2 मई को ज्येष्ठ माह का प्रारंभ व्यतिपात योग और विशाखा नक्षत्र में हो रहा है। उस दिन व्यतिपात योग प्रात:काल से लेकर रात 09:45 पी एम तक है, उसके बाद से वरीयान् बनेगा। वहीं विशाखा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर पूर्ण रात्रि तक है। ज्येष्ठ माह के पहले दिन चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य मेष राशि में होंगे।
ज्येष्ठ की पहली तिथि में त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो 3 मई को 12:49 ए एम से लेकर सुबह 05:39 ए एम तक है। तिथि की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होती है।
ज्येष्ठ माह 2026 का समापन
ज्येष्ठ माह का समापन पूर्णिमा के दिन होगा। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 29 जून को 03:06 ए एम पर हो रहा है और इसका समापन 30 जून को 05:26 ए एम पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को होगी। इस आधार पर ज्येष्ठ माह का समापन 29 जून को होगा।
ज्येष्ठ माह में करें यह एक उपाय
ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप यानि वामन अवतार की पूजा करनी चाहिए। इससे व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय मिलती है और पाप का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ जैसा पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन जो लोग पूजा पाठ आदि नहीं कर सकते हैं, उनके लिए ज्येष्ठ माह में एक सबसे सरल उपाय है, जिसे करने से आपके पाप भी मिट जाएंगे और मृत्यु के बाद मोक्ष की भी प्राप्ति हो सकती है। आपको नरक नहीं जाना पड़ेगा।
इसके लिए आप ज्येष्ठ माह में हर दिन जल का दान करें। आप प्यासे लोगों को पानी पिलाएं। अपने घर के बाहर मटके में पानी भरकर छांव में रख दें। ताकि जो राहगीर वहां से गुजरे, वो पानी पी सके। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर छांव में पशु और पक्षियों के लिए रखें। ज्येष्ठ माह में जल का दान करने से बड़ा कोई पुण्य कर्म नहीं होता है। ऐसा करने वालों पर भगवान विष्णु की कृपा होती है। वह जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है।
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