हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का विशेष महत्व बताया गया है। हनुमान जी की पूजा को संकटों से मुक्ति दिलाने वाली सबसे प्रभावी साधना माना जाता है। बजरंगबली को मंगलवार विशेष रूप से प्रिय है लेकिन जब यह दिन ज्येष्ठ मास में आता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ महीने में 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो भक्तों के लिए बेहद शुभ अवसर माने जा रहे हैं। मान्यता है कि इन दिनों हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने पर मंगल दोष, शनि कष्ट और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। आखिर क्यों ज्येष्ठ मास हनुमान जी को प्रिय है, आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद भारद्वाज से।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह खास होने वाला है क्योंकि इसमें पूरे 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। सामान्यतः यह संख्या 4 या 5 ही होती है लेकिन इस बार अधिक मास के कारण स्थिति बदल गई है। ज्येष्ठ माह दो मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा, जिसमें 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और 15 जून तक रहेगा। चूंकि यह अधिक मास भी ज्येष्ठ में ही आ रहा है, इसलिए इसे ज्येष्ठ अधिक मास कहा जाएगा। यही वजह है कि इस पूरे समय में भक्तों को 8 बड़े मंगल का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कब-कब बड़ा मंगल?
1. 5 मई 2026 को पहला बड़ा मंगल
2. 12 मई 2026 को दूसरा बड़ा मंगल
3. 19 मई 2026 को तीसरा बड़ा मंगल
4. 26 मई 2026 को चौथा बड़ा मंगल
5. 2 जून 2026 को पांचवां बड़ा मंगल
6. 9 जून 2026 को छठा बड़ा मंगल
7. 16 जून 2026 को सातवां बड़ा मंगल
8. 23 जून 2026 को आठवां बड़ा मंगल
भगवान राम और पवन पुत्र हनुमान का मिलन
ज्येष्ठ मास को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इस दौरान आने वाले मंगलवार विशेष रूप से शुभ होते हैं, जिनमें लोग मांगलिक कार्य और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इसी पावन महीने में भगवान राम और पवन पुत्र हनुमान का मिलन हुआ था, इसलिए यह समय हनुमान जी की भक्ति के लिए खास होता है। भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को पानी पिलाना, जगह-जगह प्याऊ लगाना और सेवा भाव रखना महान पुण्य का कार्य माना गया है। इस माह में किया गया दान-पुण्य कई गुना फल देता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
पहले बड़े मंगल पर करें ये उपाय
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष या मंगल ग्रह नीच या शुत्र क्षेत्र में विराजमान होता है, तो व्यक्ति के साथ दुर्घटना होना जैसे चोट लगना या शत्रु पक्ष हावी रहता है। साथ ही व्यक्ति पराक्रम नहीं दिखा पाता है। ऐसी स्थिति में आपको हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। पहले बड़े मंगल को मंदिर में जाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और घी का दीपक लगाएं। उसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करने से भी मंगल और शनि ग्रह के कारण मिलने वाली पीड़ा कम होती है।
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