नई दिल्ली। आज के समय में मोबाइल बच्चों की पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक का सबसे बड़ा साधन बनता जा रहा है। पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दोस्तों के साथ समय बिताते थे, लेकिन अब पढ़ाई हो या गेम, कार्टून देखना हो या कोई एक्टिविटी, ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने ही बीत रहा है। यही वजह है कि बच्चों में छोटी उम्र से ही आंखों में थकान, सिरदर्द और नजर कमजोर होने जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं। दरअसल, कई माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनके बच्चे को इतनी कम उम्र में चश्मा क्यों लग गया और आगे चलकर आंखों पर इसका कितना असर पड़ेगा।
बता दें कि अंबाला शहर नागरिक अस्पताल की होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता के अनुसार, आज बच्चों की दिनचर्या में मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पढ़ाई से लेकर गेम खेलने तक बच्चे फोन पर काफी समय बिता रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखनी चाहिए। मोबाइल इस्तेमाल करते समय आंखों और स्क्रीन के बीच उचित दूरी रखना भी जरूरी है।
मोबाइल से बच्चों की आंखों पर पड़ रहा असर
होम्योपैथिक डॉ. रजिता ने बताया कि अगर बच्चा मोबाइल इस्तेमाल कर रहा है तो स्क्रीन को आंखों के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए। उन्होंने करीब 30 सेंटीमीटर की दूरी रखने और स्क्रीन की ब्राइटनेस बहुत ज्यादा न रखने की सलाह दी। इसके साथ ही लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना भी जरूरी है।
इंटरनेट देखकर खुद दवा लेना सही नहीं
वहीं, डॉक्टर रजिता ने कहा कि आजकल इंटरनेट पर हर बीमारी के इलाज से जुड़े वीडियो आसानी से उपलब्ध हैं। कई लोग इन्हें देखकर खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। होम्योपैथिक उपचार में भी मरीज के लक्षण, उसकी समस्या और उसके कारण को समझने के बाद ही दवा दी जाती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर व्यक्ति की समस्या अलग हो सकती है, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इलाज शुरू नहीं करना चाहिए।
बच्चों की डाइट में हरी सब्जियां और फल जरूरी
डॉक्टर के अनुसार, बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास में खानपान की भी अहम भूमिका है। बच्चों की डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल शामिल करने चाहिए। वहीं जंक फूड और ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजों का सेवन कम करना बेहतर है। अगर बच्चों को घर पर ही पौष्टिक तरीके से तैयार भोजन दिया जाए तो इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
लगातार स्क्रीन देखने वालों को भी आंखों को देना चाहिए आराम
उन्होंने बताया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि ऑफिस में लगातार कंप्यूटर या दूसरी स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों को भी आंखों को आराम देना चाहिए। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान महसूस हो सकती है। इसलिए बीच-बीच में स्क्रीन से नजर हटाकर कुछ समय के लिए आंखों को आराम देना और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। डॉक्टर ने आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारने की सलाह भी दी।
सुबह की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि जरूरी
डॉक्टर रजिता ने सुबह की दिनचर्या को बेहतर रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने सुबह उठकर कुछ समय घास पर नंगे पैर चलने और सूर्य नमस्कार जैसी शारीरिक गतिविधियां करने की बात कही। उनका कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
उन्होंने कहा कि अगर बच्चे को बार-बार आंखों में दर्द, पानी आना, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या मोबाइल देखने के बाद आंखों में ज्यादा थकान महसूस होती है तो अभिभावकों को इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में आंखों की जांच करवाना जरूरी है।
सबसे अहम बात यह है कि बच्चों के हाथ में मोबाइल देने के साथ माता-पिता यह भी तय करें कि उसका इस्तेमाल कितनी देर और किस दूरी से किया जा रहा है। समय रहते स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और बेहतर दिनचर्या अपनाने से बच्चों की आंखों और संपूर्ण स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।
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