खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव के द्वारा पहली बार नेत्रोत्सव पूजा विधान में पहुंचकर भगवान श्रीजगन्नाथ की पूजा अर्चना कर शताब्दियों पुरानी बस्तर गोंचा महापर्व की परंपरा को खंडित करने का काम किया है।बस्तर गोंचा महापर्व की परंपरानुसार बस्तर राज्य परिवार का सदस्य तब तक भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन नहीं करता था, जब तक भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के विग्रहों को तीनों रथों में रथारूढ़ न कर दिया जाए। परंपरानुसार जब भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के विग्रहो को तीनों रथों में रथारूढ़ करने के बाद बस्तर राज्य परिवार का सदस्य द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन-पूजन करने की परंपरा रही है।
बस्तर गोंचा महापर्व के परंपराओं के जानकार शिवशंकर जोशी ने बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव के द्वारा गोंचा महापर्व की परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के प्रथम महाराजा से लेकर अंतिम महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव तक बस्तर गोंचा महापर्व की परंपराओं में कभी भी शामिल नही हुए। परंपरानुसार बस्तर गोंचा महापर्व में प्रतिवर्ष बस्तर राज परिवार के द्वारा श्रीगोंचा पूजा विधान के लिए पूजन सामग्री की थाल सजाकर भिजवाया जाता था। श्रीगोंचा पूजा विधान में जब भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी की विग्रहो को तीनों रथों में रथारूढ़ करने के बाद बस्तर राज परिवार के द्वारा भेजे गये पूजन सामग्री को सबसे पहले अर्पित कर प्रसाद बस्तर राज परिवार को भिजवाये जाने की परंपरा थी।
उन्होने बताया कि 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के द्वारा पहल करते हुए लगभग 20 वर्ष पूर्व बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव को राज परिवार के द्वारा भेजे जाने वाले पूजन सामग्री के साथ स्वयं बस्तर गोंचा महापर्व में शामिल होने का आग्रह किया गया। इसके बाद बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव पूजन सामग्री के साथ स्वयं बस्तर गोंचा महापर्व में प्रति वर्ष शामिल होकर परंपरानुसार जब भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी की विग्रहो को तीनों रथों में रथारूढ़ करने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन-पूजन करने की परंपरा का निर्वहन करते रहे। लेकिन 16 जुलाई को पहली बार नेत्रोत्सव पूजा विधान में शामिल होकर बस्तर के राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव के द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के दर्शन कर एवं पूजा अर्चना कर इस परंपरा को खंडित करने का काम किया है।
शिवशंकर जोशी ने शताब्दियों पुरानी परंपरा के खंडित किए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नेत्रोत्सव पूजा विधान को संपन्न किये जाने का अधिकार 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के पदेन पाढ़ी एवं पानीग्राही को है, नेत्रोत्सव पूजा विधान में बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव का शामिल होना एवं भगवान श्रीजगन्नाथ पूजा अर्चना करना परंपरा के साथ खिलवाड़ है। बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव को बस्तर दशहरा एवं बस्तर गोंचा के परंपराओं का ज्ञान नही है। उन्हे बस्तर दशहरा एवं बस्तर गोंचा के परंपराओं का अध्यन करना चाहिए।
उन्होने कहा कि बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव बस्तर दशहरा के अनेक परंपराओं के साथ खिलवाड़ करते रहे हैं, बस्तर के प्रथम महाराजा से लेकर अंतिम महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव तक बस्तर दशहरा के जिन परंपराओं में कभी भी शामिल नही हुए, उसमें शामिल होकर परंपरा का खंडन करते रहे हैं, जिसका विरोध भी होता रहा है। बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव को यह ज्ञात होना चाहिए कि 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज को रियासतकाल से राजपरिवार के द्वारा विशेष प्रावधान के तहत दिए गए वचन का ताम्रपत्र एवं पदेन पाढ़ी एवं पानीग्राही के द्वारा बस्तर गोंचा महापर्व की परंपराओं के निर्वहन के संबध में बस्तर के अंतिम महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव द्वारा लिखित अनेक किताबों का अध्यन करने की आश्यकता है। जिससे बस्तर दशहरा एवं बस्तर गोंचा महापर्व की परंपराओं को अपने दिखावे के लिए खिलवाड़ करने पर विराम लग सके। शिवशंकर जोशी ने बस्तर के अंतिम महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव द्वारा लिखित किताबों के अंश एवं ताम्रपत्र की फोटो का हवाला देते हुए बस्तर की लोक परंपराओं को अक्षुण बनाये रखने का आग्रह किया है।
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