खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में अश्वनी शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 30 सितंबर को नवरात्र के महाअष्टमी हवन-पूजन के बाद अर्धरात्री में 12 बजे होने वाली निशा जात्रा रस्म विशुध्द रूप से तांत्रिक पूजा में देवी-देवताओं के गणों के लिए बलि देने की रात होती है।
निशा जात्रा रस्म में जगदलपुर स्थित अनुपमा चौक में स्थित मां खमेश्वरी के निशा जात्रा मंदिर में 11 बकरों की बलि दी जायेगी । सिरहासार के सामने स्थित मावली मंदिर से इस रात को 12 गांवों के राऊत जाति के लोग देवी-देवताओं के गणों के लिए भोग तैयार करते हैं, जिसमें चावल, खीर, उड़द की दाल तथा उड़द से बने बड़े बनाकर मिट्टी के 24 हंडियों रखकर मुंह में कपड़े बांधकर भोग सामग्री वाली हंडियों को निशाजात्रा गुड़ी तक ले जाने के लिए कांवड़ यात्रा जनसमूह के साथ जुलूस के रूप में जायेंगे।
बस्तर दशहरा में अष्टमी तिथि को रथ परिक्रमा नहीं होती वहीं आज मंगलवार काे देवी-देवताओं के गणों को प्रसन्न करने निशा जात्रा विधान काे संपन्न करवाने में बकरों के अवाला कुम्हड़ा और मोंगरी मछली की भी बलि दी जाती है। अष्टमी तिथि के आधी रात में अनुपमा चौक के समीप निशा जात्रा मंदिर में 11 बकरों की बलि दिये जाने के बाद, इसके अलावा मावली माता मंदिर में 2, राजमहल के सिहंड्योढ़ी में 2, काली मंदिर में 1 बकरे की बलि दी जाती है, जबकि दंतेश्वरी मंदिर में कुम्हड़ा एवं 1 काले कबूतर व 7 मोंगरी मछलियों की बलि दी जाएगी।
निशा जात्रा मंदिर में राजपरिवारके सदस्य, राजगुरु और दंतेश्वरी के मख्य पुजारी के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा के बाद भोग सामग्री की खाली हंडियों को फोड़ दिया जाता है, ताकि इनका दुरुपयोग न हो, 11 बकरों की बलि से पहले राजगुरु बकरों के कान में मंत्र फूंककर देवी-देवताओं के गणों को समर्पित करने और हत्या का दोष किसी पर नही लगे इसके लिए बेगुनाही का मंत्र देते हैं। यह प्रक्रिया आज मंगलवार की मध्य रात्री 12 बजे के बाद पूरा की जावेगी, निशा जात्रा रस्म में महिलाओं एवं बच्चाें काे नही शामिल हाेने के लिए बकायदा पाेस्टर चस्पा कर हिदायत दी गई है।
Trending
- सरकार प्रदेश के प्रत्येक नगर और गांव के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध – मंत्री टंक राम वर्मा
- वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा: अंबिकापुर के संजय पार्क में खुलेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर
- विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व मनाने के लिए अनुमति पूजा विधान में दिखी अपार उत्साह
- मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल से दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे 10 वर्षीय रिमोन के परिवार में जगी नई उम्मीद
- लोकतंत्र के महापर्व में युवाओं की भागीदारी: शासकीय महाविद्यालय मरवाही में स्वीप व एनएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान
- छत्तीसगढ़ में 240 ई-बसों की राह खुलेगी, 11 अक्टूबर को होगा कंसेशन एग्रीमेंट
- दीपावली से पहले शहर को कचरामुक्त करें, सेवाओं में देरी बर्दाश्त नहीं – सोनमणि बोरा
- विशेष लेख – पर्यटन के जरिए ग्रामीण सशक्तिकरण: विष्णु देव साय सरकार की अनूठी पहल


