भाजपा पर सच दबाने का आरोप, बोले बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई? सुरक्षा और यात्रा मार्ग बदलने की भी हो निष्पक्ष जांच
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष कुमार-बीजापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर ने जिला मुख्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले को लेकर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान है, लेकिन झीरम नरसंहार के पीछे रहे बड़े षड्यंत्र और बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका का अब तक पर्दाफाश नहीं हुआ है। उन्होंने इसे
आधा अधूरा न्याय करार दिया
विक्रम मंडावी ने कहा कि 23 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में स्व. नंदकुमार पटेल, स्व. महेंद्र कर्मा, स्व. विद्याचरण शुक्ल, स्व. उदय मुदलियार सहित 32 लोगों की हत्या हुई थी। इतनी बड़ी और संगठित घटना केवल छोटे स्तर के नक्सलियों के बूते संभव नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं के नाम प्रारंभिक एफआईआर में शामिल किए थे, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया।
बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई
मंडावी ने सवाल उठाया कि गणपति और रमन्ना सहित कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम प्रारंभिक कार्रवाई में सामने आए थे। बाद में चार्जशीट से उनके नाम हटाए जाने का कारण क्या था? उन्होंने कहा कि एनआईए द्वारा वांछित घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, बावजूद इसके उनसे झीरम मामले में पूछताछ और अभियोजन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।उन्होंने चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और सुजाता जैसे आत्मसमर्पित नक्सलियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि ये लोग संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं तो झीरम मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई।
सुरक्षा हटाने और मार्ग बदलने पर भी उठाए सवाल
विधायक ने कहा कि झीरम हमले की जांच में कई महत्वपूर्ण सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई? यात्रा का मार्ग किसके निर्देश पर और क्यों बदला गया? हमले की योजना किसने बनाई? घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों से पर्याप्त पूछताछ क्यों नहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान घटना के बाद भी मौके पर पड़े रहे और मोबाइल फोन तक जब्त नहीं किए गए। मंडावी ने यह भी सवाल उठाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और एडीजी नक्सल से एनआईए ने कब और किस स्तर पर पूछताछ की। भाजपा पर लगाया झीरम का सच दबाने का आरोप
विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लेने से लेकर कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच रुकने तक कई सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच के पक्ष में फैसला दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक जांच शुरू नहीं की है। कांग्रेस की मांग है कि झीरम नरसंहार में राजनीतिक षड्यंत्र, सुरक्षा व्यवस्था हटाए जाने, यात्रा का मार्ग बदले जाने और बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष और संपूर्ण जांच कराई जाए।
प्रेस वार्ता में लालू राठौर, शंकर कुड़ियम, आर. वेणुगोपाल राव, प्रवीण डोंगरे, राजेश जैन, ज्योति कुमार और जितेंद्र हेमला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


