नई दिल्ली। खाना खाने के बाद सौंफ मिश्री की एक छोटी सी चुटकी लेना हमारे यहां काफी पुरानी आदत है। होटल और रेस्टोरेंट में तो खाना खत्म होने के बाद अक्सर यह जरूर मिल जाती है। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ मुंह की बदबू दूर करने या स्वाद बदलने के लिए खाते हैं। लेकिन सौंफ को भोजन के बाद चबाने की परंपरा के पीछे पाचन से जुड़ी वजह भी मानी जाती है। सौंफ में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो इसे भोजन के बाद चबाने के लिए लोकप्रिय बनाते हैं।
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक खाने के बाद कई लोगों को पेट भारी लगने लगता है। कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या डकार जैसी सामान्य परेशानियां भी होती हैं। ऐसे में थोड़ी सौंफ चबाना मददगार हो सकता है। सौंफ में मौजूद प्राकृतिक तेल और दूसरे यौगिक पाचन तंत्र को सपोर्ट कर सकते हैं। यही वजह है कि भारत में लंबे समय से भोजन के बाद सौंफ खाने की आदत चली आ रही है।
सौंफ को माउथ फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल करने की सबसे बड़ी वजह इसकी खुशबू है। खाना खाने के बाद मुंह में भोजन की गंध रह सकती है। सौंफ चबाने से मुंह में लार बढ़ती है और इसकी प्राकृतिक खुशबू कुछ समय के लिए सांसों को ताजगी देती है। इसी कारण कई घरों में भी खाना खाने के बाद सौंफ रखी जाती है।
सौंफ का स्वाद हर किसी को पसंद आए इसलिए इसमें मिश्री मिला दी जाती है। मिश्री से इसका स्वाद मीठा हो जाता है और सौंफ खाने में ज्यादा अच्छी लगती है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है कि मिश्री भी मुख्य रूप से चीनी ही है। इसलिए इसे ज्यादा मात्रा में खाना सेहत के लिए सही नहीं माना जा सकता। खासकर जिन लोगों को शुगर नियंत्रित रखने की जरूरत है उन्हें मिश्री की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक सौंफ और मिश्री को मिलाकर चूर्ण बनाकर भी रखा जा सकता है। इसमें मिश्री की मात्रा कम और सौंफ की मात्रा ज्यादा रखना बेहतर रहता है। इस मिश्रण को खाने के बाद करीब आधा आधा चम्मच सुबह और शाम लिया जा सकता है। इससे भोजन के बाद मुंह में ताजगी बनी रहती है और सौंफ अपने प्राकृतिक गुणों के कारण पाचन को सपोर्ट करती है। खास बात यह है कि सौंफ को अच्छी तरह चबाने से उसकी खुशबू लंबे समय तक मुंह में रहती है इसलिए यह सामान्य माउथ फ्रेशनर के मुकाबले भी अच्छा विकल्प माना जाता है।
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