नई दिल्ली। बदलता मौसम, दिनभर की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच अगर आप सुकून और सेहत का एक साथ अहसास चाहते हैं, तो पारंपरिक तुलसी की चाय सबसे बेहतरीन विकल्प है। औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, बल्कि पाचन और मानसिक शांति के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। जानिए इस देसी नुस्खे के फायदे, डॉक्टर की राय और इसे बनाने का सही तरीका।
तुलसी की चाय भारतीय घरों में पारंपरिक रूप से सदियों से इस्तेमाल होने वाला आसान और देसी घरेलू नुस्खा है। इसकी खुशबू मन को सुकून देती है और स्वाद भी बेहद शानदार होता है। मौसम के बदलते रुख को देखते हुए एक कप गर्म तुलसी चाय शरीर को गर्माहट देने के साथ दिनभर की थकान को दूर करने में भी राहत का अहसास करा सकती है। यह किसी संजीवनी से कम नहीं है।
तुलसी के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और कई जैव सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं। अतः तुलसी की चाय को सामान्य स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी माना गया है। बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी के दौरान इसके काढ़े का सेवन आराम दे सकता है। हालांकि, पहले से कोई गंभीर रोग हो, तो बगैर चिकित्सक की राय लिए इसका सेवन न करें।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, आज के दौर में अगर दिमाग को शांत रखना है, तो तुलसी की गर्म चाय सुकून देने वाला विकल्प हो सकती है। इसकी खुशबू और गर्माहट तनाव तथा मानसिक थकान के बीच आराम का अहसास करा सकती है। काम के लंबे दिन के बाद एक कप तुलसी की चाय के साथ कुछ मिनट शांत बैठना मन को हल्का महसूस कराता है। मोबाइल की घंटियां थोड़ी देर बंद रखना और तुलसी की चुस्कियां लेना अपने आप में बेहतर होता है।
तुलसी की चाय पाचन से जुड़ी सामान्य परेशानियों में बेहद लाभकारी और गुणकारी है। गर्म पेय के रूप में इसका सेवन गैस, भारीपन और अपच जैसी हल्की दिक्कतों में आराम का अहसास दे सकता है। तुलसी का पारंपरिक इस्तेमाल पेट को सहज रखने के लिए लंबे समय से होता आ रहा है। भोजन के बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन कई लोगों को भाता है। हालांकि लगातार पेट दर्द, तेज एसिडिटी या दूसरी गंभीर समस्या हो, तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
तुलसी के ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े संभावित लाभ भी बताए जाते हैं, लेकिन इन्हें पक्के उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। तुलसी की चाय को संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है। हां, अगर आप डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की दवाएं ले रहे हैं, तो केवल तुलसी चाय के भरोसे अपनी दवा बंद न करें।
तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे त्वचा के लिए भी उपयोगी माना जाता है। तुलसी की गर्म चाय गले और सांस से जुड़ी हल्की असहजता में आराम दे सकती है। लेकिन अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सांस फूलने या लगातार खांसी जैसी समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूरी है। देसी चुस्की सही है, मगर इसे संपूर्ण इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
तुलसी की चाय बनाने के लिए एक कप पानी में लगभग 5 से 7 ताजे तुलसी के पत्ते डालकर कुछ मिनट धीमी आंच पर उबालना चाहिए। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा अदरक मिलाया जा सकता है। मीठा पसंद हो तो शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन बहुत गर्म पानी में शहद डालने के बजाय चाय को थोड़ा ठंडा होने देना चाहिए। इसका सीमित मात्रा में सेवन किया जाता है, ज्यादा पीना जरूरी नहीं होता है।
तुलसी की चाय सस्ती, आसानी से उपलब्ध और बनाने में बेहद आसान भी है। इसकी गर्माहट, खुशबू और पारंपरिक उपयोग इसकी महत्ता को दोगुना बढ़ा देते हैं। मौसम बदलने पर यह शरीर को आराम देने वाला अच्छा घरेलू नुस्खा साबित हो सकती है। ध्यान दें, गर्भावस्था, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाओं की स्थिति में इसका लगातार सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना समझदारी और सुरक्षित है। निश्चित रूप से तुलसी की पत्ती छोटी जरूर है, लेकिन देसी रसोई में इसके फायदे बहुत बड़े हैं।
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