आज, 8 मार्च 2026, रविवार को देशभर में ‘रंग पंचमी’ का त्योहार अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसे ‘देव पंचमी’ या ‘श्री पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होकर भक्तों के साथ रंगों की होली खेलते हैं।
पंचांग और तिथि विवरण
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि का विवरण इस प्रकार है:
| विवरण | समय/तिथि |
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 7 मार्च 2026, शाम 07:17 बजे |
| पंचमी तिथि समाप्त | 8 मार्च 2026, रात 09:10 बजे |
| पर्व की तिथि | 8 मार्च 2026 (उदया तिथि के अनुसार) |
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (आज)
धार्मिक अनुष्ठानों और भगवान को गुलाल अर्पित करने के लिए आज के शुभ समय निम्नलिखित हैं:
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सुबह का मुहूर्त: सुबह 08:07 बजे से 11:04 बजे तक।
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दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 02:00 बजे तक।
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शाम का मुहूर्त: शाम 06:25 बजे से रात 09:28 बजे तक।
पूजा विधि और परंपराएं
रंग पंचमी का पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त कर सकारात्मकता लाने का माध्यम है।
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देवताओं का पूजन: आज भगवान श्री कृष्ण, राधा रानी, विष्णु जी और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
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गुलाल अर्पण: मान्यता है कि गुलाल को सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय पहले आराध्य के चरणों में अर्पित करना चाहिए।
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मंत्र जाप: कृष्ण पूजा के समय “ॐ क्लीं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
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सात्विक भोग: पूजा के समापन पर सात्विक मिठाई, गुड़ और मिश्री का भोग लगाएं।
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उपाय: आर्थिक समृद्धि के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को लाल गुलाल अर्पित कर ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए।
रंग पंचमी का महत्व
होली के पांच दिन बाद आने वाली यह पंचमी होली के उत्सव का विस्तार है। यह दिन विशेष रूप से मध्य प्रदेश (इंदौर, उज्जैन), महाराष्ट्र और उत्तर भारत के ब्रज क्षेत्र में बहुत भव्यता के साथ मनाया जाता है। इंदौर में इसे ‘गैर’ उत्सव के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, जहाँ पूरा शहर रंगों के उत्सव में डूब जाता है।
विशेष नोट: इस दिन का मुख्य उद्देश्य वातावरण को शुद्ध करना और आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना है। पर्यावरण की दृष्टि से आज के दिन प्राकृतिक और हर्बल गुलाल का उपयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है।


