KWNS- प्रिया पाठक, रायपुर । छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ लेने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी नकेल कस दी है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक में ऐसे 17 गंभीर मामलों पर सीधी सुनवाई की गई। प्रशासन की इस सख्ती से भविष्य में नियुक्तियों और शैक्षणिक प्रवेश में पारदर्शिता आएगी और दोषियों को जेल के साथ-साथ अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा l
बैठक के दौरान कुल 17 मामलों की समीक्षा की गई। इनमें से 5 मामलों में प्रमाण पत्र धारकों को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया गया है, जिसके लिए उन्हें अगली बैठक में जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। वहीं, एक संदेहास्पद मामले में विजिलेंस टीम को दोबारा जमीनी जांच (Field Investigation) करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि दोष सिद्ध होता है, तो न केवल जाति प्रमाण पत्र रद्द किया जाएगा, बल्कि संबंधित व्यक्ति को नौकरी या शिक्षा में मिले सभी आरक्षण लाभों से तत्काल वंचित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समिति अब उन सभी 250 मामलों की फाइलें तेजी से निपटा रही है जो लंबे समय से लंबित थे। अगले चरण में उन विभागों को नोटिस जारी किए जाएंगे जहां ये संदिग्ध कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत हैं। प्रशासन की इस सक्रियता से फर्जीवाड़ा करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।


