सभी जगह दिपावली की तैयारी घरों सहित बाजारों में शुरू हो चुकी है। भारतीय पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन अहोई माता का व्रत रखा जाता है और इस बार ये व्रत 13 अक्टूबर 2025, सोमवार के दिन रखा जाएगा।
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि, इस बार कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:24 मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 14 अक्टूबर को 11:09 मिनट पर होगा।
भारतीय हिंदू महिलाओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि माताएं अपने बच्चों के दीर्घायु और स्वस्थ रहने के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। संध्या के समय तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
संतान के लिए रखा जाता है व्रत
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने बताया कि, अहोई अष्टमी व्रत का महत्व बहुत ही खास माना गया है। इस व्रत को करने से आपकी संतान खुशहाल होने के साथ ही दीर्घायु भी होती हैं। हर प्रकार के रोगों से उनकी रक्षा होती है।
इस व्रत को करने से आपके घर में सुख समृद्धि बढ़ती है और आपके घर में बच्चे करियर में खूब तरक्की करते हैं। यह व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रखा जाता है और बिना अन्न जल ग्रहण तारों को जल अर्पित करने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है।
अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने बताया कि, अहोई अष्टमी के लिए पूजा का सर्वोत्तम समय शाम 05:53 मिनट से लेकर 07:08 मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर पूजा का शुभ मुहूर्त 1 घंटे 15 मिनट तक रहेगा।
तारों का दर्शन कर व्रत के पारण का समय शाम को 06:28 मिनट से शुरू हो जाएगा। वहीं, चंद्रोदय का समय रात 11:40 मिनट पर है। कुछ स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है।
अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
अहोई अष्टमी दीवाली से आठ दिन पहले और करवा चौथ के चार दिन बाद आती है। इस दिन माताएं निर्जल व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय महिलाएं अहोई देवी की पूजा-अर्चना करती हैं। कई जगहों पर तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।
मान्यता हैं कि निःसंतान महिलाओं द्वारा इस व्रत को करने से माता अहोई के आशीर्वाद से उन्हें भी संतान का सुख प्राप्त होता है।
कौन हैं अहोई माता?
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि, अहोई माता को मां पार्वती का रूप माना जाता है। इन्हें खासतौर पर संतानों की रक्षा और उनकी लंबी उम्र देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा करने से महिलाओं की कुंडली में ऐसे योग बनते हैं, जो बांझपन, गर्भपात, संतान की असमय मृत्यु और दुष्ट संतान से जुड़ी समस्याओं को दूर करते हैं।
अहोई माता की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, अहोई माता का रूप साही (नेवला) के रूप में दर्शाया गया है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक महिला, जो अपने पुत्रों की मां थी, जंगल में मिट्टी खोदते समय गलती से साही के बच्चों को मार देती है।
इसके बाद वह महिला देवी से क्षमा याचना करती है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी उसे आशीर्वाद देती हैं कि उसकी संतान सुरक्षित रहेगी। तभी से माताएं अहोई माता की पूजा कर अपनी संतान की दीर्घायु और कल्याण की कामना करती हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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