नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की माटी न केवल कृषि के लिए उपजाऊ है, बल्कि यहां की परंपरागत देसी भाजियां भी स्वास्थ्य के लिहाज से किसी आयुर्वेदिक औषधि से कम नहीं हैं। इन भाजियों में शामिल है। ‘मुसकेनी भाजी’, जिसे आयुर्वेद में ब्राम्ही के नाम से जाना जाता है। राजधानी रायपुर स्थित श्री नारायण प्रसाद अवस्थी शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ। राजेश सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ की परंपरागत भाजियां न केवल स्वाद में अनोखी होती हैं, बल्कि उनके औषधीय गुण भी चौंकाने वाले हैं।
डॉ. सिंह बताते हैं कि मुसकेनी भाजी यानी ब्राम्ही को स्थानीय बोली में यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके पत्ते चूहे के कान जैसे होते हैं। चूहे को छत्तीसगढ़ी में मुसक कहा जाता है, इसलिए इसे मुसकेनी कहा जाता है। यह भाजी एक अत्यंत शक्तिशाली नर्वाइन टॉनिक है, जो केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को पोषण देकर उसे सशक्त बनाने का कार्य करती है।
लिगामेंट और हड्डियों के लिए वरदान
मुसकेनी भाजी को लिगामेंट के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। जिन लोगों को कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, या लिगामेंट कमजोर होने की समस्या है, उनके लिए यह भाजी प्राकृतिक इलाज के तौर पर कारगर हो सकती है। यह भाजी हार्ट, वेन्स यानी शिराओं और गर्भाशय में मौजूद स्फिंक्टर्स को भी टोन देती है, जिससे इन अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
दिमागी ताकत और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक
डॉ. सिंह कहते हैं कि मुसकेनी भाजी का उपयोग दिमागी स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह ब्रेन सेल्स को एक्टिवेट करती है, जिससे मानसिक सतर्कता, स्मरणशक्ति और एकाग्रता में सुधार होता है। बच्चों को यदि नियमित रूप से यह भाजी खिलाई जाए तो उनमें पढ़ाई के प्रति एकाग्रता बढ़ती है और भूलने की बीमारी में भी राहत मिलती है। आयुर्वेद में इसे सबसे बेस्ट बुद्धि बढ़ाने वाली औषधि माना गया है।
आधुनिक खानपान के बीच छत्तीसगढ़ की यह परंपरागत भाजियां अब फिर से लोगों की थाली में जगह बना रही हैं। स्वास्थ्य जागरूकता के बढ़ते रुझान के बीच ग्रामीण अंचलों की ये वनस्पतियां अब शहरी रसोई में भी पहुंचने लगी हैं।डॉ. सिंह का मानना है कि यदि हम इन देसी भाजियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें और इन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल करें, तो दवाइयों पर निर्भरता कम हो सकती है। मुसकेनी भाजी जैसे पौधे न केवल भोजन हैं, बल्कि ये छत्तीसगढ़ की लोकजीवन परंपरा और चिकित्सा ज्ञान का हिस्सा हैं, जिसे संजोने और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ की परंपरागत भाजियां केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी अमूल्य धरोहर हैं। मुसकेनी भाजी इसका एक शानदार उदाहरण है, जो शरीर, मस्तिष्क और नसों की मजबूती के लिए एक प्राकृतिक उपाय प्रदान करती है। यह समय है जब हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और प्रकृति से मिले इस खजाने को अपनी थाली में शामिल करें।
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