प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में हैं और काशी के कोतवाल काल भैरव के दर्श करेंगे। इस मंदिर को लेकर कई दिलचस्प मान्यताएं हैं। माना जाता है कि भगवान विश्वनाथ बनारस के राजा हैं और काल भैरव इन प्राचीन नगरी के कोतवाल। यही कारण है कि इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि काशी विश्वनाथ के बाद यदि कोई काल भैरव का दर्शन नहीं करता है तो उसकी पूजा अधूरी रहती है। बताया जा रहा है, शायद यही कारण है कि मोदी ने इस बार काल भैरव दर्शन करने का भी फैसला किया है। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे। वैसे मान्यता यह भी है कि बाबा विश्वनाथ के इस शहर में रहने के लिए बाबा काल भैरव की इजाजत लेना जरूरी होती है।
नहीं होता इस कोतवाली का निरीक्षण
यूं तो समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न पुलिस थानों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन वाराणसी में काल भैरव के पास वाले थाने का कभी किसी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया। मान्यता है कि यहां काल भैरव स्वयं निरीक्षण करते हैं। कोई बड़ा स्थानीय अधिकारी भी इस चौकी में नहीं जाता है।
बनारस के लोगों का मानना है कि बाबा विश्वनाथ और उनका भगवान तथा भक्त का नहीं, राजा और प्रजा का रिश्ता है।
यूं काशी पहुंचे थे काल भैरव
काल भैरव के काशी पहुंचने की कथा भी बहुत रोचक है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा ने एक बार भगवान शिव की निंदा की थी। इससे काल भैरव गुस्सा हो गए और उन्होंने अपना नाखूनों से ब्रह्मा का मुंह काट दिया।
इसके बाद काल भैरव के नाखून में ब्रह्मा का खून चिपक गया। भैरव ने खूब कोशिश की, लेकिन खून नहीं छूटा। तब भगवान विष्णु ने काल भैरव को काशी भेजा। यहां पहुंचकर उन्हें ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और उसके बाद वे यहीं स्थापित हो गए।

