हनुमान जी के बारे में सब जानते हैं कि वह चिरंजीवी हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि उनको चिरंजीवी बनने का आशीर्वाद किसने दिया। हनुमान जी इस प्रथ्वी पर बने रहें, इसका भी अपना एक उद्देश्य है। इस आर्टिकल में बताएंगे कि आखिर वह कौन सी घटना है, जिसने उन्हें चिरंजीवी बना दिया।
जब सूर्य को निगलने वाले थे हनुमान…
यह बात तब की है जब हनुमान जी बहुत छोटे थे, लेकिन शरारती बहुत थे। वह एक दिन सुबह उठे, तो उन्होंने बादलों के बीच सूर्यदेव को लाल रंग का कोई फल समझ लिया। वह उनको खाने के लिए उड़े। वह जब बिल्कुल पास आ गए, तो इंद्र देव की निगाह उन पर पड़ी। उन्होंने तुरंत अपना वज्र अस्त्र उन पर छोड़ दिया। हनुमान जी को वज्र लगा, तो वह धरती पर आकर गिर गए। यह देख उनके पिता पवन देव को बहुत गुस्सा आ गया, उन्होंने हवा ही बंद कर दी। जिससे दुनिया भर के जीव-जंतु बैचेन हो उठे।
यह देख सभी देवी-देवता पवन देवता के पास पहुंचे। उन्होंने उनसे हवा को चलाने की विनती की और हनुमान जी को ठीक कर दिया। उनकी हनु यानि कि ठोड़ी वज्र की वजह से थोड़ी सी टेड़ी हो गई, इसलिए उनका नाम ही हनुमान हो गया। उसके बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें वरदान व शक्तियां दीं। उनमें से एक था पृथ्वी के खत्म होने तक वह धरती पर रुके रहेंगे।
हर युग में मौजूद हैं हनुमान जी
उनके चिरंजीवी होने की वजह से ही हनुमान जी हर युग में मौजूद रहे हैं। वह त्रेता में भगवान राम के साथ हैं। द्वापर में भगवान कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने हनुमान जी से सहायता मांगी थी। वह अर्जुन के रथ पर सवार हुए थे। कलयुग में तो गोस्वामी तुलसीदास जी ने खुद कहा कि हनुमान जी ने उन्हें भगवान राम के चरित्र की कथा सुनाई, इसलिए वह इतनी सुंदर रचना लिख पाए।

