Khabarworld24.com –■ गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए “एक राष्ट्र, एक चुनाव” (One Nation, One Election) के सिद्धांत को साहसपूर्ण दूरदर्शिता का एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से सुशासन को नए आयाम मिल सकते हैं और यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और भी सुदृढ़ बनाएगा।
एक राष्ट्र, एक चुनाव का महत्व: राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने से समय, संसाधन और धन की बचत होगी, जिससे विभिन्न राज्यों में चुनावी अनिश्चितताओं का अंत हो सकता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल सरकारी मशीनरी पर दबाव को कम करेगी बल्कि लगातार चुनावों से हो रहे आर्थिक नुकसान को भी रोकेगी।
चुनावी खर्च और संसाधनों की बचत: वर्तमान में भारत में अलग-अलग समय पर चुनाव कराए जाने से भारी मात्रा में संसाधनों का उपयोग होता है। एक अध्ययन के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव में लगभग ₹60,000 करोड़ से अधिक खर्च हुए थे, जबकि विभिन्न राज्यों में चुनावी खर्च इस राशि के अतिरिक्त था। यदि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की नीति अपनाई जाती है, तो चुनावी खर्च में 40-50% तक की बचत की जा सकती है। इसके साथ ही, सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग की प्रशासनिक कार्यक्षमता को भी बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा।
औपनिवेशिक मानसिकता में बदलाव: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हाल के वर्षों में औपनिवेशिक मानसिकता को बदलने के ठोस प्रयास किए गए हैं। उन्होंने इसे स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद का सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया। मुर्मू ने कहा, “1947 में हमने स्वाधीनता प्राप्त कर ली थी, लेकिन औपनिवेशिक मानसिकता के कई अवशेष लंबे समय तक विद्यमान रहे।” उन्होंने सरकार द्वारा विभिन्न सुधारात्मक कदमों और नीतियों का उल्लेख किया, जिनसे भारत को नई दिशा मिली है।
सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ: राष्ट्रपति ने अपने भाषण में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न सुधारात्मक और कल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी योजनाओं की प्रशंसा की, जिसने महामारी के कठिन समय में करोड़ों गरीब नागरिकों को राहत दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और स्वच्छ भारत मिशन का भी विशेष उल्लेख किया, जो आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए हैं।
सुधारों की दिशा में ठोस प्रयास: राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हाल के दौर में सुधारात्मक नीतियों के तहत भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है। देश की अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए, उन्होंने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रही, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। इससे भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
संविधान की मूल भावना का सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में संविधान की मूल भावना और इसकी शक्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “हमारे संविधान ने हमें जिस लोकतंत्र, समानता और न्याय की नींव दी है, उसे मजबूत करना हम सबकी जिम्मेदारी है।” राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र की सशक्तिकरण के लिए लोगों की भागीदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और इसे बढ़ावा देने के लिए चुनाव प्रणाली में सुधार आवश्यक है।
निष्कर्ष: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह संबोधन सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ नीति को लेकर स्पष्ट संदेश देता है कि यह न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही, उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता से छुटकारा पाने और संविधान की मर्यादाओं का सम्मान करने पर भी जोर दिया। राष्ट्रपति का यह भाषण देश के विकास, सुधार और समृद्धि की दिशा में एक नई दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

