Khabarworld24.com -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित किया। यह उनका 118वां एपिसोड था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने महाकुंभ 2025 की विशेषताओं और देश की विविधता में एकता का उल्लेख किया। उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ को भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि यह महोत्सव समरसता और सामाजिक सौहार्द्र का प्रतीक है। महाकुंभ 2025 की शुरुआत ऐतिहासिक और दिव्य योग के साथ हो चुकी है, और इस बार यह आयोजन कई अनूठी विशेषताओं के साथ हो रहा है।
महाकुंभ 2025 का महत्व:
प्रयागराज का महाकुंभ भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। हर 12 साल में आयोजित होने वाला यह महापर्व दुनियाभर से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह आयोजन धार्मिक कर्मकांडों और आध्यात्मिकता से परे, विविधता में एकता और समरसता का संदेश भी देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार के महाकुंभ को अद्वितीय बताया और कहा, “यह आयोजन समता और समरसता का असाधारण संगम है, जिसमें देशभर से लोग आकर एक साथ जुड़ते हैं। महाकुंभ विविधता में एकता के विचार को सशक्त करता है, और यही भारतीय संस्कृति का सार है।”
महाकुंभ 2025 के आकंड़े:
- श्रद्धालुओं की संख्या: 2025 के महाकुंभ में अनुमानित 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रयागराज का यह महाकुंभ देश के साथ-साथ दुनियाभर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
- अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी: 100 से अधिक देशों से लगभग 5 लाख विदेशी श्रद्धालुओं ने इस पवित्र आयोजन में भाग लेने की योजना बनाई है।
- स्नान घाटों की संख्या: संगम पर बनाए गए 25 स्नान घाटों पर श्रद्धालु पवित्र स्नान कर रहे हैं।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: महाकुंभ के दौरान 50 से अधिक स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ रोज़ाना 10,000 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
महाकुंभ के दौरान विशेष दिव्य योग:
इस बार महाकुंभ में कई दिव्य योग बन रहे हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं। यह दुर्लभ संयोग महाकुंभ में आध्यात्मिक शक्ति और धार्मिक अनुभव को और प्रबल बनाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इन योगों का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है और इन दिनों में स्नान, पूजा और अन्य धार्मिक कर्मकांडों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री का संदेश:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ के आयोजन को देश की सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “महाकुंभ 2025 केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है। यहां आकर हम समझते हैं कि हमारी ताकत हमारी विविधता में निहित है।”
उन्होंने आगे कहा, “महाकुंभ देश के हर कोने से लोगों को एक साथ लाता है, चाहे उनकी भाषा, धर्म, जाति या संस्कृति कुछ भी हो। यह आयोजन हमें यह सिखाता है कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में निहित है और यही हमारे राष्ट्र की शक्ति है।”
सरकार की तैयारियां:
महाकुंभ 2025 के लिए सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आयोजन की तैयारी को लेकर प्रशासन की तारीफ की और बताया कि सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
- सुरक्षा इंतजाम: 30,000 से अधिक पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और विशेष टास्क फोर्स के जवानों को सुरक्षा में तैनात किया गया है।
- स्वच्छता अभियान: इस बार महाकुंभ को स्वच्छ और हरा-भरा बनाए रखने के लिए 10,000 सफाईकर्मी 24 घंटे काम कर रहे हैं।
- डिजिटल महाकुंभ: डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत, इस बार महाकुंभ का लाइव प्रसारण और ई-सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि श्रद्धालु अपनी यात्रा को सुविधाजनक बना सकें। महाकुंभ के लिए खासतौर पर एक मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया है, जिसमें मार्गदर्शन, स्वास्थ्य सेवाएं और यातायात की जानकारी मिल रही है।
अंतरिक्ष में भारत की उड़ान:
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष में भारत की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियां हमें गर्वित करती हैं और हमें नए सपनों की ओर ले जाती हैं। भारत अब न केवल एक अंतरिक्ष शक्ति है, बल्कि इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।”
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं:
प्रधानमंत्री मोदी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह दिन हमें हमारे संविधान और लोकतंत्र की महानता की याद दिलाता है।
निष्कर्ष:
महाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत की विविधता, समरसता और एकता का प्रतीक है। यह आयोजन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, जहां विभिन्न संस्कृतियों के लोग एक साथ आकर आध्यात्मिकता और समरसता का अनुभव करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इस महाकुंभ के माध्यम से भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को और मजबूत करता है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

