Khabarworld24.com –एजेंसी: अखनूर
जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के जरिये चल रहे आतंकवादी गतिविधियों और भारत विरोधी षड्यंत्रों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीओके की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए किया जा रहा है और भारत की सुरक्षा को लगातार खतरा पैदा हो रहा है।
आतंकवाद का स्रोत: पाकिस्तान
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी भारत में घुसपैठ करने वाले 80% से अधिक आतंकवादी पाकिस्तान से ही आते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ भारत को मिली रणनीतिक बढ़त का सही उपयोग अगर तत्कालीन सरकार द्वारा किया गया होता, तो सीमा पार से जारी आतंकवाद को उसी समय समाप्त किया जा सकता था।
जम्मू-कश्मीर पीओके के बिना अधूरा
रक्षा मंत्री ने अखनूर के टांडा आर्टिलरी ब्रिगेड में आयोजित 9वें सशस्त्र बल वेटरन्स डे कार्यक्रम में कहा कि “जम्मू-कश्मीर पीओके के बिना अधूरा है। पीओके भारत के माथे का मुकुट मणि है।” उन्होंने इस दौरान अखनूर की ऐतिहासिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम’ को विफल करने के भारतीय सेना के साहसिक प्रयासों की सराहना की, जब पाकिस्तान ने अखनूर में घुसपैठ की नाकाम कोशिश की थी।
धारा 370 हटाने के बाद बड़े बदलाव
रक्षा मंत्री ने बताया कि आतंकवाद खत्म करने की शुरुआत जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करके की गई है। उन्होंने कहा कि इससे इलाके में हालात काफी हद तक बदले हैं और अब यहां शांति और स्थिरता लाने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। लेकिन पीओके के बिना जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण अधूरा है।
पीओके से संचालित हो रहा भारत विरोधी एजेंडा
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के शासकों पर हमला बोलते हुए कहा कि पीओके में रहने वाली आम जनता को एक सम्मानजनक जीवन से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हुक्मरान मजहब के नाम पर पीओके के नागरिकों को भारत के खिलाफ उकसाने और बरगलाने का षड्यंत्र कर रहे हैं। हाल ही में पीओके के अवैध प्रधानमंत्री अनवारुल हक ने जो भारत विरोधी बयान दिया है, वह पाकिस्तान की पुरानी साजिश का हिस्सा है। यह वही साजिश है जो पाकिस्तान के शासक जनरल जिया उल हक़ के समय से चला रहे हैं।
आतंकवाद और पाकिस्तान के षड्यंत्रों का विश्लेषण
पाकिस्तान लंबे समय से पीओके का इस्तेमाल आतंकवाद के केंद्र के रूप में कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान आतंकवादी समूहों को प्रशिक्षण, हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। कई आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2014 से 2023 के बीच आतंकवादी हमलों में बड़ी संख्या में आतंकी पीओके से प्रशिक्षित होकर आए हैं।
- आतंकी घुसपैठ के आंकड़े: 2020 में भारतीय सुरक्षा बलों ने 140 से अधिक आतंकवादियों को पकड़ा जो कि पीओके से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। 2022 में, यह संख्या 220 से अधिक हो गई, जिसमें कई प्रमुख आतंकी संगठन जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य शामिल थे।
- आतंकवादी शिविरों की संख्या: सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 तक पीओके में लगभग 30 आतंकी शिविर सक्रिय थे, जिनमें से 14 प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र माने जाते हैं।
- आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं: जम्मू और कश्मीर में 2016 से 2023 के बीच 350 से अधिक आतंकवादी हमले हुए, जिनमें से अधिकांश का संबंध पीओके से था।
आगे की राह
भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई ढिलाई नहीं होगी। राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत की सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। साथ ही, उन्होंने आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि पीओके का भारत में विलय ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
निष्कर्ष
रक्षा मंत्री के बयान के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि पीओके में चल रहे आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भारत ने अपनी रणनीति और प्रतिबद्धता को और सख्त कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
स्रोत: रक्षा मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, 2023-24 के आंकड़े
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

