गणेश चतुर्थी 14 सितंबर सोमवार को है। इस दिन मुंबई से लेकर पूरे देशभर में गणेश जन्मोत्सव मनाया जाएगा। लोग पंडालों और अपने घरों में गणपति बप्पा की स्थापना और पूजा करेंगे। जो लोग अपने घर पर गणेश जी की स्थापना करना चाहते हैं और बिना पंडित जी के स्वयं पूजा करने की सोच रहे हैं, उन लोगों को मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, मूर्ति से जुड़े नियमों को जानना चाहिए। इसे बारे में विस्तार से जानते हैं सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर और हस्तरेखा शास्त्री चंद्रकांत सारस्वत से।
दोपहर में हुआ था गणेश जी का जन्म
एस्ट्रोलॉजर सारस्वत बताते हैं कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को दोपहर के समय हुआ था। इस बार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर प्रारंभ होगी और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
गणेश मूर्ति स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त
गणेश जी का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए उस समय ही मूर्ति स्थापना और पूजा करना उत्तम फलदायी रहता है। गणेश मूर्ति स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
चतुर्थी के दिन राहुकाल सुबह 7 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 29 तक रहेगा, इस समय में आप कोई भी पूजा पाठ और स्थापना न करें। इस साल एक अच्छी और खास बात यह है कि भद्रा का भेद करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस बार भद्रा 14 सितंबर की शाम 7 बजकर 20 मिनट से 15 सितंबर की सुबह 6 बजकर 25 मिनट तक है। इस समय स्थापना का कोई मुहूर्त नहीं है।
गणेश चतुर्थी पर न देखें चंद्रमा, जानें वर्जित समय
14 सिंतबर को शुरू होने वाली गणेश चतुर्थी 25 सितंबर तक चलेगी। 25 सितंबर को विसर्जन के साथ इसका समापन होगा। गणेश चतुर्थी के दिन लोगों को चांद नहीं देखना है। अगर चांद देखते हैं तो आप पर कोई कलंक लग सकता है। चतुर्थी को सुबह में 09:06 बजे से रात 08:04 बजे तक चंद्रमा नहीं देखना है। 10 घंटे 58 मिनट तक चंद्रमा का दर्शन वर्जित है।
स्थापना के लिए कैसी हो गणेश जी की मूर्ति?
गणेश चतुर्थी पर हम गणेश जी की मूर्ति लाकर अपने घर में स्थापना करते हैं। आपको भी गणपति बप्पा की स्थापना करनी है तो मूर्ति की लंबाई 7 से 10 इंच होनी चाहिए। सामान्य भाषा में कहें तो आप 5 से 12 अंगुल के गणपति की स्थापना करें, वह शास्त्र सम्मत रहेगा।
यह गणेश जी सर्वोत्तम बताए गए हैं। इनकी स्थापना से घर में खुशहाली आती है। यदि आप बहुत बड़ी मूर्ति स्थापित करते हैं तो आपको विशेष नियमों पालन करना होगा और वैदिक नियमों से ही पूजा करनी होगी। इसमें आपको पुरोहित, पंडित या आचार्य की जरूर पड़ेगी।
मूर्ति में इस बात का ध्यान रखें कि घर में स्थापना के लिए गणेश जी की सूंड बाई तरफ मुड़ी हुई हो। दाई तरफ यानि दक्षिण की तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी को घर में लाते हैं तो आपको पूजा पूरे विधि विधान से करना होगा।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि और नियम
* गणेश जी की मूर्ति को घर के ईशान कोण यानि नॉर्थ ईस्ट में रखें। ईशान कोण न हो तो पूर्व दिशा में गणेश जी की स्थापना करें। चौकी को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
* पूजा के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम और दक्षिण की तरफ मुख करके पूजा करते हैं तो आपको पूर्ण फल नहीं मिलेगा।
* मूर्ति को जब लेकर आएं तो उसे सीधे जमीन या गाड़ी में रखने से पहले एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर ही उसके ऊपर रखें।
* मूर्ति के दाएं तरफ कलश स्थापना करें। यदि आप कलश स्थापना नहीं करेंगे तो गणपति बप्पा आपकी स्थापना और पूजा को स्वीकार नहीं करेंगे।
* गणेश जी की पूजा में लाल पुष्प खासकर गुलाब के फूल का प्रयोग करें। आपकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।
* प्रतिदिन पूजा के समय गणेश जी को दूर्वा, रोली, अक्षत् अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं।
गणेश पूजा का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमो नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
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