नई दिल्ली। बारिश का मौसम शुरू हो चुका हैं, ऐसे में सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या परेशान करने लगती हैं। लेकिन इसमें भी मधुमालती के फूल और पत्तियों से बने काढ़े का पारंपरिक उपयोग बताया गया है। इससे कफ ढीला और गले की परेशानी में राहत मिल सकती है। लेकिन खांसी या जुकाम लगातार बनी रही, सांस लेने में परेशानी हो या तेज बुखार आए, तो घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय नजदीकी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें।
मधुमालती की पत्तियों को पीसकर इसका लेप बनाना चाहिए और उसको पारंपरिक रूप से खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और कुछ त्वचा संबंधी परेशानियों में लगाने से लाभ मिलता हैं। पत्तियों के पेस्ट का प्रयोग घरेलू उपचारों में उपयोग सदियों से पारंम्परिक तौर पर किया जाता रहा है। लेकिन हर त्वचा समस्या की वजह अलग-अलग हो सकती है। ध्यान दे किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की राय जरूरी है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, मधुमालती के फूल या पत्तियों का रस रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायता प्रदान कर सकती है। शुगर से जुड़े पारंपरिक नुस्खों में भी यह कारगर साबित हो सकती हैं। लेकिन इसे डायबिटीज की दवा का विकल्प मानना खतरनाक हो सकता है। शुगर कंट्रोल करने वाली दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना बंद नहीं करनी चाहिए।
मधुमालती किसी संजीवनी से कम नहीं है, बस प्रयोग करने का तरीका गलत नहीं होना चाहिए। मधुमालती की पत्तियों से तैयार काढ़ा किडनी की सूजन या जलन कम कर सकता हैं। लेकिन कभी-कभी किडनी की बीमारी का स्तर अलग हो सकता हैं, जिसमें इसका प्रयोग वर्जित हो सकता है। इसलिए अगर पेशाब में दर्द, खून, सूजन, बुखार या कम पेशाब जैसी शिकायत हो, तो तुरंत एक्सपर्ट की राय ले।
मधुमालती की पत्तियों और बीजों के सेवन करने से पेट के कीड़ों, अपच और त्वचा संबंधी समस्याओं के में लाभ मिलता हैं। इसके बीजों को कृमिनाशक के नाम से जाना जाता है। लेकिन पौधे के किसी हिस्से की सही मात्रा और सुरक्षित सेवन हर व्यक्ति के लिए समान नहीं हो सकता हैं। इसलिए बीजों या पत्तियों को पीसकर खाने-पीने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलना सुरखित माना जाता है।
बलिया निवासी आचार्य राजकुमार पंडित के अनुसार, मधुमालती को लेकर वास्तु शास्त्र में भी कई मान्यताएं बताई गई है। कुछ लोग इसे घर की पूर्व या उत्तर दिशा में लगाने को सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि से जोड़ते हैं। लेकिन ये वास्तु संबंधी मान्यताएं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हो सकती हैं।
निश्चित रूप से मधुमालती एक आकर्षक बेल है और पारंपरिक चिकित्सा में इसके कई अद्भुत फायदे बताए गए हैं। लेकिन खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, गंभीर रोगियों और नियमित दवा लेने वालों को इसका आंतरिक सेवन बिना विशेषज्ञ से पूछे नहीं करना चाहिए। पेट, त्वचा, किडनी या मधुमेह की समस्या होने पर पहले सही चिकित्सकीय जांच कराना बुद्धिमानी हैं। यह बहुत ही खूबसूरती दिखाई देती हैं।
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