जनजातीय संस्कृति, परंपरा और गौरव को विद्यार्थियों ने लोकनृत्य व लोककथाओं के माध्यम से किया जीवंत
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष पाठक-मुंगेली। पीएम श्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, बंधवा में जनजातीय संस्कृति, परंपरा एवं गौरव के प्रतीक विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन हर्षोल्लास, भव्यता एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना, पारंपरिक कला एवं लोक संस्कृति के प्रति जागरूक करना तथा जनजातीय नायकों के योगदान और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र सिंह तंवर एवं अभिभावक-शिक्षक संघ के सदस्य जीवन लाल मरावी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही विद्यालय परिसर में विश्व आदिवासी दिवस समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
लोककथाओं और लोकनृत्यों ने बांधा समां
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें जनजातीय समुदायों से जुड़ी प्राचीन लोककथाओं, परंपराओं एवं पारंपरिक लोकनृत्यों को प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में निवास करने वाली जनजातियों की जीवनशैली, रहन-सहन, वेशभूषा, परंपराओं और कला-संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया।
विद्यार्थियों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों, शिक्षकों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया। विभिन्न राज्यों की जनजातीय संस्कृति को दर्शाते लोकनृत्यों ने विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल बना दिया। विद्यार्थियों ने अपनी भावपूर्ण एवं आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत की विविधता में जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान है और इसकी समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है।
उत्कृष्ट प्रतिभागियों का किया गया सम्मान
सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट एवं सराहनीय प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय परिवार की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस अवसर पर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार की ओर से उपस्थित अभिभावकों का विशेष सम्मान भी किया गया। अभिभावकों को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के पारंपरिक प्रतीक गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया। विद्यालय परिवार द्वारा किए गए इस आत्मीय सम्मान से अभिभावक भी अभिभूत नजर आए। इस पहल ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच आपसी सहयोग, सम्मान एवं आत्मीय संबंधों को और मजबूत किया।
प्राचार्य ने दिया शिक्षा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र सिंह तंवर ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं, लोककला एवं जीवन मूल्य हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी संस्कृति एवं मूल संस्कारों से जुड़े रहने के साथ-साथ शिक्षा को जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं एवं जनजातीय नायकों के योगदान को जानना चाहिए, ताकि वे अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
विद्यार्थियों ने संभाली कार्यक्रम की कमान
कार्यक्रम का प्रभावी, ऊर्जावान एवं आकर्षक संचालन विद्यालय की विद्यार्थी कीर्ति जगत एवं रूद्रप्रताप ने किया। दोनों विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कार्यक्रम का संचालन करते हुए उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को कार्यक्रम से जोड़े रखा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम प्रभारी शिक्षक अन्नु, पीजीटी संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कार्यक्रम का कुशल समन्वय एवं संचालन किया। वहीं कार्यक्रम के अंत में हरिओम शर्मा, पीजीटी गणित ने उपस्थित सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाला प्रेरणादायी अवसर साबित हुआ। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिसर में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा।


