नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट फैंस अभी पिछले दो टी20 वर्ल्ड कप की जीत का जश्न ठीक से मना भी नहीं पाए थे कि अचानक टीम इंडिया एक ऐसी अनिश्चितता के भंवर में फंस गई है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। जो टीम बैक-टू-बैक विश्व चैंपियन बनी हो, उसका संतुलन इस कदर बिगड़ जाएगा, यह सोचना भी नामुमकिन था। आयरलैंड के खिलाफ मिली 0-2 की करारी शिकस्त को महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने ‘भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक’ करार दिया था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अब हैरी ब्रूक की कप्तानी वाली इंग्लैंड टीम ने भी विश्व चैंपियनों की कमजोरी को पूरी तरह डिकोड कर लिया है। इंग्लैंड को अब अच्छे से पता है कि भारत के किस बल्लेबाज को कहां फंसाना है और किस गेंदबाज को निशाना बनाना है।
इस उथल-पुथल के बीच, गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर (कप्तान) की जोड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहली जीत की तलाश में भटक रही है। ऐसे में कड़े फैसले लेने का समय आ गया है। सीरीज के तीसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया में बड़े और कड़े बदलाव देखने को मिलें, तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए।
अगर भारतीय टीम के मौजूदा प्रदर्शन पर नजर डालें, तो गेंदबाजों ने कुल मिलाकर ठीक-ठाक काम किया है। इसलिए ज्यादातर गेंदबाजों की जगह सुरक्षित दिखती है। लेकिन लेग स्पिनर रवि बिश्नोई इस समय सबसे बड़े निशाने पर हैं। दूसरे मैच में मिली हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर और विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने हार का ठीकरा सीधे तौर पर बिश्नोई के खराब प्रदर्शन पर फोड़ा। बिश्नोई ने अपने 4 ओवरों के कोटे में बिना कोई विकेट लिए 60 रन लुटा दिए, जिसमें उनके आखिरी ओवर से आए 29 रन भी शामिल थे।
सवाल तो इस बात पर भी उठने चाहिए कि आखिर पारी का बेहद महत्वपूर्ण 17वां ओवर एक ऐसे स्पिनर को क्यों थमाया गया जो पहले से ही रन खा रहा था? खैर, इस खराब प्रदर्शन के बाद तीसरे मैच में बिश्नोई का पत्ता कटना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, भारत के पास बेंच पर स्पिन के विकल्प के रूप में केवल वाशिंगटन सुंदर मौजूद हैं, लेकिन उनका हालिया फॉर्म भी कुछ खास नहीं रहा है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज के रूप में प्रिंस यादव को वापस लाने पर विचार कर सकता है, जिन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन में तीन विकेट चटकाकर प्रभावित किया था।
‘बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार बनी कमजोरी’
इस बीच, पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर टीम इंडिया के कॉम्बिनेशन को लेकर एक बेहद गंभीर और तार्किक मुद्दा उठाया है। कैफ ने याद दिलाया कि कैसे 2026 टी20 वर्ल्ड कप के बीच में संजू सैमसन को प्लेइंग-11 में वापस बुलाना पड़ा था, क्योंकि विपक्षी टीमें भारत के दो बाएं हाथ के ओपनर्स के खिलाफ आसानी से रणनीति बना रही थीं।
मौजूदा टीम में भी यही बीमारी दोबारा घर करती दिख रही है। युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने अपने डेब्यू मैच में प्रतिभा की झलक तो दिखाई, लेकिन वे विल जैक्स की ऑफ-स्पिन का शिकार बन गए। सूर्यवंशी के आने और संजू सैमसन के बाहर होने की वजह से भारत के टॉप-7 बल्लेबाजों में कप्तान श्रेयस अय्यर एकमात्र दाएं हाथ के बल्लेबाज बचे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी विरोधी टीम के लिए यह एक ऐसी कमजोरी है, जिसे आसानी से टारगेट किया जा सकता है। ऑफ-स्पिनर्स और बाएं हाथ के स्पिनर्स भारतीय बल्लेबाजी को पूरी तरह बांध कर रख सकते हैं।
यदि गंभीर और अय्यर की जोड़ी को इस कमजोरी का अहसास होता है, तो उन्हें तीसरे मैच में कुछ कठोर फैसले लेने होंगे। टीम को दाएं और बाएं हाथ का सही कॉम्बिनेशन देने के लिए ईशान किशन या तिलक वर्मा में से किसी एक को ड्रॉप करना पड़ सकता है। हालांकि, तिलक वर्मा के साथ दिक्कत यह है कि वे टीम के उप-कप्तान हैं, ऐसे में उप-कप्तान को बाहर बैठाना कप्तानी और मैनेजमेंट के लिए एक बेहद पेचीदा फैसला होगा।
यदि बदलाव होता है, तो संजू सैमसन या ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है। संजू सैमसन के मामले में, उन्हें एक बार फिर से ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसी स्थिति में या तो सैमसन खुद ओपन करेंगे या फिर 15 वर्षीय युवा वैभव सूर्यवंशी को नंबर तीन पर भेजा जा सकता है। आईपीएल में संजू सैमसन का टॉप ऑर्डर और विशेषकर नंबर तीन पर खेलने का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है, जो उन्हें इस भूमिका के लिए सूर्यवंशी से कहीं अधिक अनुभवी और बेहतर विकल्प बनाता है।
गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल शुरुआती सफर कांटों भरा नजर आ रहा है। अगर भारत को सीरीज में बने रहना है और अपनी साख बचानी है, तो तीसरे टी20 में न सिर्फ सही कॉम्बिनेशन के साथ उतरना होगा, बल्कि मैदान पर चैंपियन की तरह प्रदर्शन भी करना होगा।
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