कुंडली में जब शनि दोष हो या फिर साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव होता है तो ज्योतिषशास्त्र में इसके अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है। शनि का छल्ला यानि लोहे का रिंग। कुछ लोग बिना सलाह लिए ही शनि का छल्ला अपनी अंगुली में पहन लेते हैं। लेकिन गलत अंगुली में शनि का छल्ला का पहनने से लाभ की जगत नुकसान हो सकता है। यह छोटी सी गलती आपके जीवन में उथल-पुथल मचा सकता है। कभी-कभी तो आपके बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं।
शनि का छल्ला कैसे बनता है?
शनि का छल्ला मुख्य रुप से लोहे की कील से बना होता है। इसमें भी यदि नाव की कील का शनि का छल्ला बनाएं तो उसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है। लोहा शनिदेव की प्रिय धातु है। इस वजह से ही लोहे से शनि का छल्ला बनाते हैं, इसे किसी अन्य धातु से नहीं बनाते हैं, या फिर विशेष परिस्थितियों में कुंडली के आधार पर ज्योतिषीय सलाह अलग हो सकती है। शनि का छल्ला शनिवार के दिन पहनना चाहिए।
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किस अंगुली में पहनते हैं शनि का छल्ला?
शनि का छल्ला हमेशा शनि की अंगुली में ही पहनना चाहिए। यदि आप उस अंगुली में इसे नहीं पहनते हैं तो यह विपरीत प्रभाव डाल सकता है। इससे आपके काम खराब हो सकते हैं। आपकी हथेली की सबसे बड़ी अंगुली यानि मध्यमा अंगुली में ही शनि का छल्ला पहनते हैं। इसे दाहिने हाथ में पहनते हैं। तब यह शुभ प्रभाव देगा और आप शनि के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं।
भूलकर भी अनामिका अंगुली में न पहनें शनि का छल्ला
शनि का छल्ला गलती से भी अनामिका अंगुली यानि रिंग फिंगर में नहीं पहनना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो फिर आपके काम और रिश्ते खराब होंगे। दरअसल अनामिका अंगुली सूर्य की अंगुली है, जो सूर्य पर्वत से निकलती है। इसके स्वामी ग्रहों के राजा सूर्य देव हैं।
जब शनि का छल्ला सूर्य की अंगुली में पहनेंगे तो विरोधाभास और शत्रुता बढ़ेगी क्योंकि पिता सूर्य का पुत्र शनि से शत्रुता का भाव है। इसका अशुभ प्रभाव आपके करियर पर हो सकता है। आपके पिता से संंबंध खराब हो सकते हैं। बनते काम बिगड़ सकते हैं।
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