सावन का महीना हो या सामान्य दिन, भगवान शिव के भक्तों के बीच रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। दरअसल, धार्मिक मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष केवल एक माला या आभूषण नहीं, बल्कि शिव कृपा का प्रतीक है। हालांकि, ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रुद्राक्ष का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब इसे पूरी श्रद्धा और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करते हुए धारण किया जाए। बता दें कि बिना विधि-विधान के पहना गया रुद्राक्ष अपेक्षित शुभ फल नहीं देता और व्यक्ति को इसका आध्यात्मिक लाभ भी नहीं मिल पाता।
भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ रुद्राक्ष
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ माना जाता है और इसी कारण इसे शिव स्वरूप भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमपूर्वक रुद्राक्ष धारण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रुद्राक्षधारण करने के फायदे
उन्होंने कहा कि इससे मानसिक तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।इसके साथ ही नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होने लगता है और जीवन में सुख-शांति का वातावरण बनता है। उन्होंने बताया कि धर्मशास्त्रों में रुद्राक्ष को आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण साधन भी माना गया है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से पूजा-पाठ, ध्यान और मंत्र जाप में मन अधिक एकाग्र होता है।
इसके अलावा व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूरे होने, कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने और तरक्की के नए अवसर मिलने की भी धार्मिक मान्यता है। यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में लोग केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन के लिए भी रुद्राक्ष धारण कर रहे हैं।
कौन सा रूद्राक्ष धारण करें
उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष के कई प्रकार बताए गए हैं, लेकिन सभी में एकमुखी रुद्राक्ष को सबसे अधिक शुभ और प्रभावशाली माना जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार यह भगवान शिव का प्रत्यक्ष स्वरूप है। इसे विधिपूर्वक धारण करने वाले साधक पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं। उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष धारण करने के लिए सोमवार का दिन सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित है।
रुद्राक्ष कब और कैसे धारण करें
इसके अलावा, महाशिवरात्रि के दिन भी रुद्राक्ष पहनना अत्यंत फलदायी माना जाता है,ओर धारण करने से पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद रुद्राक्ष को कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर उस पर चंदन लगाएं तथा भगवान शिव के चरणों में अर्पित करें। फिर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक धारण करें।
रुद्राक्ष धारण करने वाले इन चीजों से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष को काले धागे में नहीं पहनना चाहिए, इसे लाल या पीले धागे में धारण करना अधिक शुभ माना गया है। वहीं रुद्राक्ष धारण करने के बाद तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखने, क्रोध और अनावश्यक वाद-विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्य का मानना है कि आस्था तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ अनुशासन और नियमों का भी पालन किया जाए।ऐसे में रुद्राक्ष धारण करने वाले श्रद्धालुओं के लिए केवल इसे पहनना ही नहीं, बल्कि उसकी मर्यादाओं का पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है।
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