खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़ – COP28 सम्मेलन (Conference of the Parties) संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क समझौते (UNFCCC) का 28वां वार्षिक सम्मेलन है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उपायों पर चर्चा करना और फैसले लेना है। यह सम्मेलन 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2023 तक दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित किया गया।
दुबई, UAE में, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सम्मेलन में भाग लेने वाले 197 देशों ने उत्सर्जन घटाने और अनुकूलन उपायों को तेज करने पर जोर दिया। यहां भारत की भूमिका और वैश्विक प्रयासों पर मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ:
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अक्षय ऊर्जा का विस्तार: भारत ने अपने कुल विद्युत उत्पादन में 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, भारत ने कोयला उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने से इनकार किया है, इसे विकासशील देशों के लिए आवश्यक बताया !
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कार्बन सिंक का निर्माण: भारत का लक्ष्य है 2030 तक 2.5-3 बिलियन मीट्रिक टन CO₂ को अवशोषित करने के लिए वन कवर बढ़ाना। हालांकि, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है!
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नेट-जीरो उत्सर्जन: भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का वादा किया है। इसे हासिल करने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप की आवश्यकता है !
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जलवायु वित्त और समता: भारत ने विकसित देशों से विकासशील देशों के लिए अधिक वित्तीय सहायता की मांग की है, और “जलवायु न्याय” पर जोर दिया है ताकि सभी देशों को समान लाभ मिल सके !
COP28 के मुख्य निर्णय:
- ग्लोबल स्टॉकटेक रिपोर्ट: यह 1.5°C लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैश्विक प्रयासों का मूल्यांकन करती है। इसमें 2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना और ऊर्जा दक्षता दर को दोगुना करने का आह्वान किया गया
- “लॉस एंड डैमेज फंड” की स्थापना: यह फंड जलवायु आपदाओं से प्रभावित विकासशील देशों को सहायता प्रदान करेगा। प्रारंभिक धनराशि $725 मिलियन है, जो अपर्याप्त मानी जा रही है
भारत की चुनौतियाँ:
- भारत ने “समानता और समता” की आवश्यकता पर बल दिया, यह तर्क देते हुए कि ऐतिहासिक उत्सर्जन में विकसित देशों की भूमिका अधिक है और उन्हें वित्तीय जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
- कोयला आधारित ऊर्जा का निरंतर उपयोग विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों को जटिल बनाता है।
COP28 में भारत की भागीदारी और वैश्विक सहयोग जलवायु संकट का समाधान खोजने के लिए आवश्यक कदम हैं, लेकिन इसे हासिल करने के लिए ठोस प्रयासों और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।
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