नई दिल्ली। घर-आंगन की शोभा बढ़ाने वाला गेंदा का फूल सिर्फ सजावट या पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। पीले और नारंगी रंग के ये फूल सेहत के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं हैं। त्वचा संबंधी समस्याओं से लेकर पेट की गड़बड़ी, दर्द और तनाव तक में गेंदा लाभकारी माना जाता है।
दरअसल रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर स्मिता श्रीवास्तव (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय)लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि आयुर्वेद में गेंदा को एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर बताया गया है। त्वचा पर होने वाले दाने, खुजली, जलन या हल्के घाव पर गेंदा की पंखुड़ियों का लेप लगाने से फायदा मिलता है
पेट की समस्याओं में भी गेंदा कारगर माना गया है। गैस, अपच या हल्की पेट दर्द की स्थिति में गेंदा की सूखी पंखुड़ियों से बनी चाय पीना फायदेमंद हो सकता है। यह पाचन तंत्र को शांत करने और सूजन कम करने में मदद करता है।
दर्द और सूजन में भी गेंदा उपयोगी है। जोड़ों के दर्द या सूजन वाली जगह पर गेंदा के फूलों से बने तेल की हल्की मालिश करने से राहत मिल सकती है। इसके प्राकृतिक तत्व सूजन कम करने में सहायक माने जाते हैं।
मानसिक तनाव और अनिद्रा में भी गेंदा लाभ पहुंचा सकता है।इसकी हल्की सुगंध मन को शांत करती है और तनाव कम करने में मदद करती है। कुछ लोग गेंदा की चाय या फूलों को कमरे में रखने से सुकून महसूस करते हैं।
स्मिता श्रीवास्तव बताती हैं कि प्राकृतिक उपचार अपनाते समय सावधानी जरूरी है।किसी भी तरह की एलर्जी या पुरानी बीमारी होने पर उपयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सही तरीके से उपयोग किया जाए तो गेंदा का साधारण सा दिखने वाला फूल सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
इसके फूलों से तैयार तेल या काढ़ा त्वचा संक्रमण को कम करने में सहायक माना जाता है। कई हर्बल क्रीम और ऑयमेंट में भी गेंदा का अर्क उपयोग किया जाता है।
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