नई दिल्ली। आयुर्वेद में हजारों वर्षों से प्राकृतिक पौधों के औषधीय गुणों का उल्लेख किया गया है। इन्हीं में से एक है धतूरा, जिसे आमतौर पर भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला पवित्र फल माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पौधा जितना धार्मिक महत्व रखता है, उतना ही आयुर्वेद में औषधीय रूप से भी उपयोगी है। रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (बी.ए.एम.एस. लखनऊ विश्वविद्यालय) ने लोकल 18 से बात करते हुए धतूरे के औषधीय गुणों और उसके सावधानीपूर्वक उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
धतूरा, भगवान शिव का प्रिय, पर औषधीय दृष्टि से भी अनमोल
डॉ. स्मिता श्रीवास्तव बताती हैं कि आयुर्वेद में धतूरा को अनेक नामों से जाना जाता है- मदन, उन्मत्त, शिवप्रिय, महामोही, कृष्ण धतूरा, खरदूषण, शिव शेखर, सविष, धतूरा, धोत्रा ततूर और दतुरम। भारत में इसकी कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन केवल कुछ ही प्रजातियां औषधीय उपयोग के लिए उपयुक्त हैं, क्योंकि बाकी प्रजातियां अत्यधिक विषैली होती हैं। धतूरे के सूखे पत्ते और बीज को दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। हालांकि यह जहरीला पौधा है, फिर भी सही मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह पर इसका उपयोग कई बीमारियों में लाभदायक सिद्ध होता है।
इन बीमारियों में कारगर है धतूरा
डॉ. स्मिता के अनुसार, धतूरा में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाते हैं। यह विशेष रूप से निम्न बीमारियों में उपयोगी है, बाल झड़ना और डैंड्रफ: धतूरे का तेल सिर में लगाने से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है और रूसी की समस्या दूर होती है। बवासीर: दर्द और सूजन में राहत देने वाला यह पौधा बवासीर के लक्षणों को कम करता है। दमा और सांस संबंधी रोग: धतूरे का धुआं या चूर्ण सूंघने से श्वसन मार्ग खुलता है और सांस लेने में आसानी होती है। फेफड़ों में जमा कफ और हृदय रोग: यह पौधा शरीर से अतिरिक्त कफ निकालने में मदद करता है तथा हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है। नपुंसकता: नियंत्रित मात्रा में इसका सेवन यौन शक्ति बढ़ाने में भी उपयोगी होता है।
ऐसे करें धतूरे का प्रयोग
धतूरे का प्रयोग करने के तरीके भी सावधानीपूर्वक बताए गए हैं। जोड़ों के दर्द या सूजन में: धतूरे की पत्तियों को पीसकर लेप बना लें और दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। गर्म तासीर की वजह से यह प्राकृतिक सिकाई का काम करता है, जिससे मांसपेशियों की जकड़न और दर्द में तुरंत राहत मिलती है। दमा के मरीजों के लिए: धतूरा को अपामार्ग और जवासा नामक जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर चूर्ण तैयार करें। इस चूर्ण की सुगंध रोजाना सूंघने से सांस से जुड़ी तकलीफें कम हो जाती हैं।
सावधानी जरूरी: हालांकि, धतूरा औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए इसका उपयोग हमेशा आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए। गलत तरीके से सेवन करने पर यह विष का काम कर सकता है।
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