ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा इस वर्ष 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि सोमवार का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, व्रत, दान और भगवान लक्ष्मी-नारायण तथा भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-धान्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे शुरू होगी और 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों की सेवा करने का भी विशेष महत्व माना गया है।
अधिक मास भगवान लक्ष्मीपति विष्णु को समर्पित
Local18 से बातचीत में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं इस वर्ष की ज्येष्ठ पूर्णिमा अधिक मास के समापन के साथ आ रही है इसलिए इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। अधिक मास भगवान लक्ष्मीपति विष्णु को समर्पित माना जाता है और पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यह दिन मोक्ष की कामना और पुण्य प्राप्त करने के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।
पूर्णिमा के दिन क्या करें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी तक जाना संभव न हो तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद पितरों का तर्पण, देवताओं की पूजा और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इससे पितरों को सद्गति मिलने के साथ परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सोमवार होने के कारण भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। शिवलिंग पर जल अर्पित करने और भगवान शिव का स्मरण करने से चंद्र दोष शांत होता है और मन को शांति मिलती है। शाम के समय भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या करवाना शुभ माना गया है। इसके बाद चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करना चाहिए।
पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष की पूजा
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि वट सावित्री व्रत करने वाली महिलाओं के लिए भी यह दिन विशेष है। पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष की पूजा कर व्रत का समापन किया जा सकता है। इसके बाद चंद्रमा की पूजा कर पति की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यह परंपरा करवा चौथ की तरह ही चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने से जुड़ी मानी जाती है।
पुरुष भी रख सकते हैं पूर्णिमा का व्रत
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि पूर्णिमा का व्रत केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी रख सकते हैं। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने, दान-पुण्य करने और जरूरतमंद लोगों को शरबत या ठंडे पेय का वितरण करने से भी विशेष पुण्य मिलता है। ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में प्यासे लोगों की सेवा करना भी बड़ा धर्म माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है जबकि भगवान शिव की आराधना और चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
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