हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रखा जाने वाला व्रत इतना प्रभावशाली माना जाता है कि इससे वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस बार निर्जला एकादशी का आज रखा जाएगा। निर्जला एकादशी को सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इस दिन व्रती सूर्योदय से लेकर अगले दिन पारण तक अन्न तो दूर, जल का सेवन भी नहीं करते हैं। यही कारण है कि इसे “निर्जला” एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना को समर्पित माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक शर्मा बताते हैं कि निर्जला एकादशी का व्रत विधि-विधान और संकल्प के साथ करना चाहिए। प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन भगवान के नाम का स्मरण, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि भी होती है।
भगवान विष्णु को लगाएं पीले रंग का भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन पीले पुष्प, केले, आम, बेसन के लड्डू, केसरयुक्त खीर अथवा अन्य पीले पकवानों का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
जल सेवा का मिलता है विशेष पुण्य
निर्जला एकादशी का एक महत्वपूर्ण संदेश जल संरक्षण और जल सेवा भी माना जाता है। स्वयं जल का त्याग करने वाले श्रद्धालु इस दिन राहगीरों को ठंडा पानी, शरबत और मीठे जल का वितरण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को जल पिलाना महादान के समान पुण्य प्रदान करता है।
दान-पुण्य से बढ़ता है व्रत का फल
धर्मग्रंथों में निर्जला एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, जलपात्र, छाता, पंखा और जरूरतमंदों को दक्षिणा देने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि श्रद्धा और सेवा भाव से किया गया दान भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है तथा व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि संयम, सेवा, दान और जल के महत्व को समझाने वाला एक आध्यात्मिक उत्सव भी है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है। किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है। ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है। बताई गई किसी भी बात का K.W.N.S. व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है।
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