इस बार 25 जून को पड़ने वाली निर्जला एकादशी फरीदाबाद वासियों के लिए बेहद खास मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखता है तो उसे वर्षभर की 26 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इस बार निर्जला एकादशी गुरुवार को पड़ रही है जिसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के विवाह का शुभ दिन माना जाता है। ऐसे में फरीदाबाद के लोगों के लिए यह दिन विशेष फलदायी रहने वाला है।
निर्जला एकादशी कब है
Local18 से बातचीत में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी गुरुवार के दिन पड़ रही है। गुरुवार बड़ा ही शुभ दिन माना जाता है, क्योंकि यह भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के विवाह का दिन है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विवाह हुआ था। इसलिए जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत रखना चाहिए और लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर जल से भरा घड़ा, चने की दाल, छाता, खरबूजा, तरबूज, शरबत और चीनी का दान करना चाहिए। इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
निर्जला एकादशी का महत्व
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सामान्य रूप से वर्ष में 24 एकादशी आती हैं, लेकिन तीन वर्ष में एक बार अधिक मास आने पर पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी भी जुड़ जाती हैं। इस प्रकार कुल 26 एकादशियां हो जाती हैं। निर्जला एकादशी का व्रत करने से इन सभी 26 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी कारण इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। महाभारत काल में भीम ने वेदव्यास जी से कहा था कि उन्हें बहुत अधिक भूख लगती है और वे सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख सकते। तब वेदव्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया और बताया कि इस एक व्रत से 26 एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होगा। भीम ने कठिनाई से इस व्रत को किया था…तभी से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।
निर्जला एकादशी का व्रत कैसे करें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं निर्जला एकादशी का अर्थ बिना जल ग्रहण किए व्रत करना है। हालांकि जिन लोगों का शरीर कमजोर है वे आवश्यकता अनुसार पानी पी सकते हैं। इसके अलावा सूर्य के प्रभाव से पके हुए फल जैसे अमरूद और पपीता भी ग्रहण कर सकते हैं। जो पूरी तरह स्वस्थ हैं वे बिना जल के व्रत रखें। व्रत का सही पालन करने के लिए दशमी तिथि के दिन मखाने की खीर का सेवन करना चाहिए और नमक से परहेज करना चाहिए…क्योंकि नमक खाने से अधिक प्यास लगती है।
निर्जला एकादशी पर क्या करें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि फरीदाबाद पूर्व और दक्षिण दिशा में स्थित क्षेत्र माना जाता है। इसलिए यहां के लोगों के लिए निर्जला एकादशी विशेष शुभ फल देने वाली है। माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने और मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए इस दिन मीठा पानी, शरबत और ठंडाई का वितरण करना चाहिए। विशेष रूप से मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को शरबत पिलाने से मंगल ग्रह मजबूत होता है क्रोध कम होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं गुरुवार को मीठा पानी और शरबत बांटने से पति-पत्नी के बीच होने वाले छोटे-छोटे विवाद समाप्त होते हैं और घर में तनाव नहीं रहता। इसके अगले दिन शुक्रवार को भी शरबत बांटने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है तथा माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण के विवाह का दिन और शुक्रवार माता लक्ष्मी का दिन होने के कारण यह निर्जला एकादशी फरीदाबाद वासियों के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है।
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