खेती में कम खर्च, बेहतर पोषण और अधिक उत्पादन
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष पाठक-मुंगेली। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का विस्तार अब किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने की चुनौती के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए किफायती एवं प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब जिले में दिखाई देने लगा है। जिले के ग्राम केहरपुर के किसान सूर्यप्रकाश ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग किया है। इसके उपयोग से उन्हें फसल को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में सुविधा हुई है तथा खाद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से खेती अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बन रही है।
कृषि विभाग के उपंसचालक ने बताया कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का संतुलित उपयोग फसलों की वृद्धि में सहायक होने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धान उत्पादक क्षेत्रों में जहां किसान परंपरागत रूप से प्रति एकड़ 02 से 03 बोरी यूरिया और 01 बोरी डीएपी का उपयोग करते हैं, वहीं नैनो उर्वरकों के प्रयोग से लागत में उल्लेखनीय कमी संभव हो रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि 500 एमएल नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभावी मानी जाती है। इससे किसानों को उर्वरक लागत में बचत होने के साथ परिवहन और भंडारण की परेशानी भी कम होती है। इसी प्रकार 25 किलो डीएपी के साथ 500 एमएल नैनो डीएपी का उपयोग करने पर प्रति एकड़ 75 से 150 रुपये तक की बचत संभव है। कृषि विभाग किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक कर रहा है। इसका उद्देश्य कम लागत में अधिक उत्पादन, मिट्टी की सेहत में सुधार और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।


