वट सावित्री व्रत सुहागिनों के लिए करवा चौथ व्रत के समान माना जाता है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा का खास महत्व है क्योंकि ये पेड़ सदा फलता फूलता रहता है। इसलिए इसे अखंड वैवाहिक जीवन और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वट वृक्ष अपनी जड़ों से नए पेड़ पैदा करता है, जो जीवन, पुनर्जन्म और निरंतरता का संकेत देता है यही भाव व्रत के उद्देश्य से जुड़ा है।
माता सावित्री ने इस व्रत के प्रताप से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। चूंकि ये व्रत ज्येष्ठ के महीने में दो बार किया जाता है ऐसे में महिलाएं इसकी सही तारीख जान लें और अगर पहली बार कर रही हैं व्रत तो क्या है इसके नियम ये भी देखें।
वट सावित्री व्रत 16 या 17 मई कब
उत्तर भारत जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली आदि में महिलाएं ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत रखती हैं। इसे वट अमावस्या कहा जाता है। इसी दिन अधिकर लोग व्रत करते हैं। वट सावित्री अमावस्या 16 मई 2026 को है, इस दिन शनिवार और शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है।
तिथि – ज्येष्ठ अमावस्या तिथि शुरू होगी 16 मई 2026 को सुबह 5.11 पर और समाप्ति 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर होगी।
पूजा मुहूर्त – सुबह 7.12 – सुबह 8.24
ज्येष्ठ माह में दो बार वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत वास्तव अलग तिथियों पर अलग क्षेत्रों में मनाया जाता है. ज्येष्ठ अमावस्या के अलावा ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भी वट सावित्री व्रत करने का विधान है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में यही व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किया जाता है, जिसे वट पूर्णिमा कहा जाता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) – 29 जून 2026
तिथि – ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि शुरू होगी 29 जून 2026 को सुबह 3.06 पर और समाप्ति 30 जून 2026 को सुबह 5.26 पर होगी।
पूजा मुहूर्त – सुबह 8.55 – सुबह 10.40
पहली बार वट सावित्री व्रत कैसे करें
अगर आप पहली बार वट सावित्री व्रत कर रही हैं, तो कोशिश करें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली सुहाग की चीजें आपके मायके से आई हों। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग की साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करें। अगले दिन वट वृक्ष की पूजा के लिए एक बांस की टोकरी मे सारा पूजन सामग्री, जिसमें बस का पंखा अवश्य होना चाहिए।
इसके बाद वट (बरगद) के पेड़ के पास जाकर उस स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र बनाएं। शिव जी, सावित्री सत्यवान की पूजा करें। फिर पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें और हर चक्कर में धागा लपेटें।
वट सावित्री व्रत के दिन काले, सफेद और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें। साथ ही, इन रंगों की चूड़ियां या लहठी भी न पहनें, क्योंकि इसे परंपरा में शुभ नहीं माना जाता।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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