KWNS -संतोष पाठक, मुंगेली l छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला मुख्यालय स्थित आगर खेल परिसर में दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सहायिकाएं शामिल हुईं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने शासन-प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों की मांग उठाई।
धरना स्थल पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश में आईसीडीएस (एकीकृत बाल विकास सेवा) योजना के तहत दशकों से कार्य करने के बावजूद उन्हें आज तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। कई महिलाएं 20 से 30 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही भविष्य की कोई सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 50 वर्षों से अधिक समय से आंगनबाड़ी व्यवस्था देशभर में संचालित होने के बावजूद कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं जीने योग्य वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा, चिकित्सा सुविधा तथा अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, जिससे कर्मचारियों में गहरी निराशा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 8 मार्च तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य स्तर पर विशाल रैली आयोजित की जाएगी तथा पुनः व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
1. शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए
संघ ने मांग की कि जिस प्रकार शिक्षा कर्मियों और पंचायत कर्मियों को नीति बनाकर नियमित किया गया, उसी तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को भी नियमित कर शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
2. न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए
नियमितीकरण होने तक कार्यकर्ताओं को ₹26,000 तथा सहायिकाओं को ₹22,100 मासिक वेतन दिया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें।
3. सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
सेवानिवृत्ति या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में एकमुश्त ग्रेच्युटी, मासिक पेंशन और समूह बीमा की व्यवस्था की जाए। साथ ही चिकित्सा सुविधा और अवकाश का लाभ भी प्रदान किया जाए, जिससे बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा से बचा जा सके।
धरना प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करती हैं, फिर भी उन्हें उचित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


