खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज मंगलवार काे जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। उन्हाेने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में बस्तर के बहुत से क्षेत्रों में जनगणना नहीं कर पाए थे। खास कर बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा के कई ऐसे इलाके हैं, जहां जनगणना नहीं हो पाई थी, क्योंकि इलाका बेहद ही संवेदनशील है। वहां की जनता के पास आधार कार्ड, जॉब कार्ड या निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज नहीं हैं। बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से बस्तर के हजारों लोगों के नाम सूची से काटे जाने का खतरा मंडरा रहा है। हमें आशंका है कि बहुत सी महिलाओं के और आदिवासियों के नाम सूची से काटे जाएंगे। महिलाओं को इसलिए दिक्कत होगी क्योंकि माता-पिता के नाम का वोटर लिस्ट लाने को कहा जाएगा। उन्हाेने कहा कि मान लीजिए कोई महिला कांकेर की रहने वाली है और उसका ससुराल दंतेवाड़ा में है, तो क्या वह महिला वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने कांकेर जाकर दस्तावेज लाएगी? बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम काटे जाने की आशंका है।
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों से ऐसे दस्तावेज़ मांग रहा है जो अधिकांश बस्तरवासियों के पास मौजूद ही नहीं हैं। सरकार ने यह प्रक्रिया शुरू तो कर दी, लेकिन न तो किसी राजनीतिक दल से चर्चा की गई, न ही सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। यह सीधा-सीधा बस्तर के आम ग्रामीणों के अस्तित्व और अधिकारों पर हमला है। जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके नाम काट दिए जाएंगे, यह बहुत गंभीर स्थिति है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है, जबकि बस्तर जैसे इलाकों में दस्तावेज़ी पहचान का ढांचा बहुत कमजोर है। भूपेश बघेल ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक मंशा से प्रेरित लगती है, ताकि आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को अधिकारों से वंचित किया जा सके।
भूपेश बघेल ने धान खरीदी पर कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। सरकार ने निर्णय लिया है कि 15 तारीख को हम धान खरीदी की शुरुआत करेंगे, आज 11 तारीख है। धान खरीदी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सभी हड़ताल पर हैं। अब तक किसी भी किसान को टोकन नहीं मिला है। इसका मतलब यह है कि यह सरकार 15 तारीख तक धान खरीदी शुरू नहीं कर पाएगी। एक तरफ किसान चिंतित हैं। पूरे सीजन भर उन्हें पहले यूरिया नहीं मिला। बीमारी आई, दवाई पर बहुत खर्च हुआ, अब मनमाना बिजली का बिल आ रहा है। हड़ताल को देखकर लग रहा है कि सरकार 15 तारीख को धान खरीदी की शुरुआत नहीं कर पाएगी। यदि खरीदी नहीं होती है तो किसान बहुत परेशान होंगे।
प्रेस वार्ता में दिल्ली में हुए ब्लास्ट का मुद्दा उठाते हुए भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि पूरा सरकारी तंत्र विपक्षी नेताओं की निगरानी में लगा दिया गया है, जबकि राजधानी की सुरक्षा भगवान भरोसे है। अमित शाह की नाक के नीचे राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी घटना हो गई इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।अगर अमित शाह को केवल चुनाव प्रचार ही करना है,तो गृह मंत्रालय छोड़ देना चाहिए। देश की आंतरिक सुरक्षा मज़ाक बन चुकी है। गृह मंत्री को या तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए या फिर पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए।
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