खबर वर्ल्ड न्यूज–रायपुर। छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत हुए मुआवजा घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में इस घोटाले से राज्य को करीब 600 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने की पुष्टि हुई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त अमीन, निजी व्यक्ति और फर्जी रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले शामिल हैं।
* गिरफ्तार किए गए आरोपी:
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गोपाल राम वर्मा – सेवानिवृत्त अमीन, जल संसाधन विभाग
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नरेंद्र कुमार नायक – लोकसेवक
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खेमराज कोसले – निजी व्यक्ति
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पुनुराम देशलहरे – निजी व्यक्ति
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भोजराम साहू – निजी व्यक्ति
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कुंदन बघेल – निजी व्यक्ति
सभी आरोपियों को रायपुर विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेजा गया है।
* घोटाले का पूरा खेल – कैसे हुआ खुलासा?
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर से विशाखापत्तनम तक 950 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है। इसमें दुर्ग से आरंग तक 6-लेन और अन्य क्षेत्रों में 4-लेन सड़क प्रस्तावित है। इस निर्माण के लिए बड़ी संख्या में किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी।
मुआवजा प्रक्रिया में राजस्व अधिकारियों ने भूमाफियाओं से सांठगांठ कर जमीन के बटांकन (खाता विभाजन) और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से किसानों की बजाय भूमाफियाओं को कई गुना अधिक मुआवजा दिलवाया।
💰 अनुमानित आर्थिक नुकसान:
राज्य को इससे करीब ₹600 करोड़ का नुकसान हुआ है।
* EOW की जांच में सामने आई गड़बड़ियां:
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जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों ने पूर्व अधिग्रहित भूमि पर गलत रिपोर्ट पेश की।
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चार अन्य आरोपियों ने फरार राजस्व अधिकारियों की मदद से फर्जी बटांकन और दस्तावेज तैयार कर किसानों से कमीशन लिया।
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फर्जीवाड़ा कर भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाया गया, जबकि वास्तविक किसान आज भी मुआवजे के इंतजार में हैं।
* प्रमुख आरोपी अभी भी फरार:
इस घोटाले में नामजद सरकारी अधिकारियों में शामिल हैं:
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निर्भय कुमार साहू – तत्कालीन एसडीएम (घोटाले के समय जगदलपुर नगर निगम आयुक्त)
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शशिकांत कुर्रे – तहसीलदार
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लखेश्वर किरण – नायब तहसीलदार
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जितेंद्र साहू, बसंती धृतलहरे, लेखराम देवांगन – तीनों पटवारी
इन सभी के खिलाफ FIR दर्ज है, और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। फिलहाल ये सभी फरार हैं और EOW उनकी तलाश कर रही है।


