खबर वर्ल्ड 24-बालकृष्ण साहू- नई दिल्ली। रूस का एक विशाल और ठंडा क्षेत्र साइबेरिया इस वक्त दुनिया के लिए रहस्यमयी बना हुआ है। हाल के वर्षों में यहां कई बड़े गड्डों के निर्माण ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है। रूस में इन गड्डों को ‘बुल्गा’ कहा जाता है।
वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों की टीम अब इस रहस्य को सुलझाने में लग गई है कि आखिर ये हो क्यों रहा है और इससे पृथ्वी पर किस तरह का प्रभाव पड़ रहा है। साइबेरिया में बड़े गड्ढों का निर्माण मुख्य रूप से पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने के कारण हो रहा है। पर्माफ्रॉस्ट के बारे में अगर आप नहीं जानते, तो आपको बता दें कि पर्माफ्रॉस्ट वह परत है जो स्थायी रूप से जमी रहती है और इसमें हजारों वर्षों से कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैसें कैद होती हैं।
पृथ्वी पर जब जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ता है, तो यह पर्माफ्रॉस्ट पिघलने लगता है और फिर बड़े-बड़े गड्ढे बनने लगते हैं। दरअसल, जब पर्माफ्रॉस्ट पिघलता है तो उसमें कैद कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैसें बाहर निकलने लगती हैं। यह गैसें धीरे-धीरे जमीन के अंदर दबाव बनाती हैं और जब यह दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो यह जमीन की सतह को उड़ा देता है।
गड्ढों के बनने का कारण:
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पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना:
- साइबेरिया में भूमि की सतह के नीचे स्थायी रूप से जमी हुई बर्फ जिसे पर्माफ्रॉस्ट कहा जाता है, वह धीरे-धीरे पिघल रही है। जब पर्माफ्रॉस्ट पिघलता है, तो वहां कैद मीथेन गैस (CH₄) जैसे गैसों की एक बड़ी मात्रा सतह पर निकलती है।
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मीथेन गैस का दबाव:
- पर्माफ्रॉस्ट के भीतर जमी हुई मीथेन गैस और अन्य ग्रीनहाउस गैसें धीरे-धीरे जमा होती जाती हैं। जब तापमान बढ़ता है, तो ये गैसें पिघले हुए बर्फ के पानी में मिलकर सतह पर आने का प्रयास करती हैं। गैसों का यह दबाव धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि भूमि फट जाती है और एक बड़ा गड्ढा बन जाता है।
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ज्वालामुखीय प्रक्रिया का प्रभाव नहीं:
- पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि ये गड्ढे ज्वालामुखीय गतिविधि या उल्कापिंड के गिरने से बने हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध ने इसे नकारते हुए इसे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पर्माफ्रॉस्ट की समस्या से जोड़ा है।
गड्ढों के रहस्य का प्रभाव:
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जलवायु परिवर्तन का संकेत:
- ये गड्ढे जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। जैसे-जैसे धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है, पर्माफ्रॉस्ट तेजी से पिघल रहा है, जिससे मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में पहुंच रही हैं और जलवायु संकट को और बढ़ा रही हैं।
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भविष्य के लिए खतरा:
- इस प्रक्रिया से न केवल नए गड्ढों का निर्माण हो सकता है, बल्कि साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं। इसके साथ ही मीथेन गैस वातावरण में बढ़ने से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
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वैज्ञानिक शोध और अध्ययन:
- इन गड्ढों पर लगातार शोध किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक इनका अध्ययन करके यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह प्रक्रिया किस हद तक बढ़ सकती है और इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
साइबेरिया के इन गड्ढों का रहस्य मुख्यतः जलवायु परिवर्तन और पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से जुड़ा हुआ है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह मानव गतिविधियों से होने वाला जलवायु परिवर्तन है, जो पूरे विश्व में पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बन रहा है।

