khbarworld24-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और भारत के साथ उनके प्रशासनिक संबंधों पर गहरी चर्चा जारी है। अवैध प्रवासियों के मुद्दे और व्यापारिक टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कुछ विवादास्पद पहलुओं के बावजूद, ट्रंप का भारत पर भरोसा स्पष्ट था। खासकर अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने भारत द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की, लेकिन टैरिफ को लेकर उन्होंने भारत पर सख्त चेतावनी भी दी।
अवैध प्रवासियों पर ट्रंप का भरोसा
अमेरिकी प्रवास नीति के तहत ट्रंप ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे। भारत से अमेरिका में जाकर अवैध रूप से बसे लोगों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई थी। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान, अमेरिका ने भारत से सहयोग की उम्मीद की, खासकर अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के मामलों में। भारत ने अवैध प्रवासन पर अपनी तरफ से कड़े कानूनों को लागू करने की प्रतिबद्धता दिखाई, जिसके चलते दोनों देशों के बीच इस मामले में आपसी समझ बनी रही। भारत सरकार ने प्रवासन पर नियंत्रण को लेकर कई सुधार किए और अवैध प्रवासियों की निगरानी की प्रक्रिया को भी सख्त किया।
व्यापार टैरिफ पर ट्रंप की चेतावनी
हालांकि, व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच तनाव का विषय टैरिफ (आयात शुल्क) रहा। ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत पर लगाए गए टैरिफ को बार-बार आलोचना का शिकार बनाया। 2020 में ट्रंप ने भारत के खिलाफ कठोर टिप्पणियां करते हुए कहा था कि “भारत व्यापार में अमेरिका के साथ सबसे ज्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में से एक है”। उन्होंने विशेष रूप से मोटरसाइकिल जैसे उत्पादों पर लगने वाले भारी शुल्क का जिक्र किया और कहा कि इस तरह के टैरिफ अमेरिका के साथ व्यापार में असंतुलन पैदा कर रहे हैं।
ट्रंप ने भारत पर यह भी चेतावनी दी थी कि अगर टैरिफ में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है। 2019 में, ट्रंप प्रशासन ने भारत से सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP) का दर्जा भी वापस ले लिया था, जिसके तहत भारत को कई उत्पादों पर शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलता था। इसका भारत की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया आई और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गया।
आंकड़ों के अनुसार द्विपक्षीय व्यापार संबंध
2020 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 88.75 बिलियन डॉलर था, जिसमें अमेरिकी निर्यात 34.3 बिलियन डॉलर और भारत का निर्यात 54.4 बिलियन डॉलर था। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में नहीं था। ट्रंप प्रशासन ने इसे बार-बार एक मुद्दा बनाया और भारत से टैरिफ घटाने की मांग की।
अमेरिकी प्रवासन और व्यापारिक नीतियों को देखते हुए यह साफ था कि ट्रंप प्रशासन की रणनीति भारत को अपने घरेलू राजनीतिक एजेंडे के तहत महत्वपूर्ण भागीदार बनाने की थी, लेकिन व्यापार और टैरिफ के मुद्दों पर सख्त रुख अपनाकर उन्होंने भारत से समझौते की उम्मीद की।
भविष्य की दिशा
ट्रंप के बाद के प्रशासनिक बदलावों के साथ, अमेरिका और भारत के संबंधों में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन टैरिफ और व्यापारिक मुद्दों पर विवाद जारी रहा। हालांकि, अवैध प्रवासियों के मामले में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग मजबूत बना रहा है।
निष्कर्ष
ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों ने कई ऊँच-नीच देखी, खासकर अवैध प्रवासियों और व्यापार टैरिफ के मुद्दों पर। अवैध प्रवासियों के नियंत्रण में जहां भारत ने कदम उठाए, वहीं व्यापार में असंतुलन और टैरिफ को लेकर ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक आंकड़े भले ही बढ़े हों, लेकिन टैरिफ विवाद ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया आयाम जोड़ा।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न न्यूज़ आर्टिकल & Chat-GPT

