khbarworld24-भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई है। यह यात्रा, जो वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, 2020 में दोनों देशों के बीच संबंधों के तनाव के कारण स्थगित कर दी गई थी। अब, हालिया समझौते के बाद, यह यात्रा 2025 की गर्मियों से फिर से शुरू हो सकती है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की पृष्ठभूमि
कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत के हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का आवास माना जाता है, और मानसरोवर झील को पुण्य प्राप्ति का स्रोत। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि भारत-चीन के बीच रिश्तों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
2020 में रिश्तों का संकट
2020 में भारत और चीन के रिश्तों में खराबी आई, जब लद्दाख के गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इसके परिणामस्वरूप कैलाश मानसरोवर यात्रा सहित कई द्विपक्षीय योजनाएं रुक गईं। यात्रा का रुकना भारत के तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि सालों से यह एक पारंपरिक यात्रा रही थी।
भारत-चीन सहमति
हाल ही में, भारत और चीन के बीच एक नया समझौता हुआ है, जिसके तहत कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। दोनों देशों के अधिकारियों ने यात्रा के सुरक्षित संचालन, मार्गों और प्रक्रिया को लेकर बातचीत की है। यह यात्रा 2025 की गर्मियों से शुरू हो सकती है, हालांकि इसके लिए अंतिम निर्णय यात्रा की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।
यात्रा की विशेषताएँ
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मार्ग: यात्रा के लिए प्रमुख मार्गों में उत्तराखंड का धारचूला क्षेत्र, नेपाल और फिर चीन के तिब्बत क्षेत्र से होते हुए कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचा जाता है।
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यात्रियों की संख्या: पूर्व में हर वर्ष हजारों तीर्थयात्री इस यात्रा में शामिल होते थे, और अब उम्मीद की जा रही है कि यात्रा फिर से उस स्तर पर पहुंच सकती है, जहां हर वर्ष 5000-7000 यात्री यात्रा करते हैं।
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सुरक्षा उपाय: चीन द्वारा सुरक्षा को लेकर कड़े प्रबंध किए जाएंगे। भारतीय यात्रियों को यात्रा के दौरान हर तरह की सहायता प्राप्त होगी। यात्रा मार्ग पर मेडिकल सुविधाएं और बैकअप सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा।
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तिथि और अवधि: यह यात्रा प्रत्येक वर्ष गर्मी के मौसम में शुरू होती है और लगभग 3-4 सप्ताह तक चलती है। यात्रियों को कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह यात्रा धार्मिक अनुभव के रूप में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सरकार की भूमिका
भारत सरकार ने यात्रा के लिए विशेष यात्रा अनुमतियों और मार्गों को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। साथ ही, यात्री सुरक्षा के लिए वीजा और अन्य कागजी प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने इस यात्रा को लेकर चीन के साथ एक उचित समझौते पर सहमति जताई है, जिससे यात्रा की शुरुआत आसान हो सके।
भविष्य की उम्मीदें
इस नए समझौते से यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारत-चीन संबंधों में एक नई दिशा की शुरुआत हो सकती है। कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संवाद का एक महत्वपूर्ण साधन भी बन सकती है।
निष्कर्ष
कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुरू होना दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक कदम है। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व की है, बल्कि यह भारत-चीन संबंधों को सुधारने और दोनों देशों के बीच विश्वास बनाने का एक अवसर भी प्रस्तुत करती है।
Balkrishna sahu Raipur

