नई दिल्ली। दिवाली पर बच्चे पटाखे और आतिशबाजी जलाने को लेकर काफी उत्साहित रहते हैं। इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। कई बार पटाखे जलाते समय बच्चों के हाथ, चेहरे या शरीर के दूसरे हिस्सों पर जलने की चोट लग जाती है। ऐसी स्थिति में माता-पिता घबराकर टूथपेस्ट, हल्दी या बर्फ जैसे घरेलू उपाय करने लगते हैं, जबकि शुरुआत के 15 से 20 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सही समय पर प्राथमिक उपचार मिलने से त्वचा को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। इसी बारे में फरीदाबाद के अमृता अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पंखुरी दुदानी ने जरूरी जानकारी दी है।
जलने पर सबसे पहले करें ये काम
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि पटाखे से त्वचा जलने का थोड़ा भी शक हो या सिर्फ लालपन दिखाई दे, तो तुरंत प्रभावित हिस्से को बहते हुए पानी के नीचे रखना चाहिए। हाथ, चेहरा या शरीर का कोई भी हिस्सा जला हो, उसे कम से कम 15 से 20 मिनट तक ठंडे पानी से धोना जरूरी है। इसके लिए बर्फ का सीधा इस्तेमाल करने के बजाय बहता हुआ पानी ज्यादा बेहतर है। ठंडे पानी में बर्फ डालकर भी प्रभावित हिस्से को रखा जा सकता है। इसके बाद चोट की गंभीरता को देखते हुए नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए।
टूथपेस्ट और हल्दी लगाने से बचें
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि अक्सर लोग जलने पर टूथपेस्ट, हल्दी या बर्फ लगा देते हैं, इन घरेलू उपायों से खास फायदा नहीं मिलता। टूथपेस्ट लगाने से डॉक्टर को जले हुए हिस्से की जांच करने में भी परेशानी होती है। डॉक्टर पंखुरी ने सिल्वर आधारित कोलॉइडल ऑइंटमेंट का उदाहरण देते हुए सिल्वरेक्स का जिक्र किया। इसे ठंडक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अस्पताल ले जाते समय प्रभावित हिस्से को साफ गीले सूती कपड़े में लपेटकर ले जाना बेहतर है।
फफोले पड़ने पर बिल्कुल न करें ये गलती
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि जलने के बाद त्वचा पर फफोले पड़ जाएं तो उन्हें खुद से फोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। फफोले पड़ना गंभीर जलने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अस्पताल जाकर इलाज कराना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक लगाकर पट्टी करते हैं। अगर फफोले की वजह से परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर उसे सुरक्षित तरीके से खोल सकते हैं। उसके ऊपर की त्वचा को खुद से हटाना भी ठीक नहीं है।
दर्द न होना भी हो सकता है गंभीर संकेत
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि कई बार जलने का निशान छोटा दिखाई देता है, लेकिन अंदर की त्वचा को गहरा नुकसान पहुंचा होता है। अगर दर्द 15 से 20 मिनट से ज्यादा बना रहे, फफोले पड़ जाएं या बिल्कुल दर्द महसूस न हो और त्वचा पर कालापन दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गहरे बर्न में नसों को नुकसान पहुंचने के कारण दर्द महसूस नहीं होता। ऐसे में बच्चा सामान्य रूप से खेल रहा हो, तब भी उसे अस्पताल ले जाना जरूरी है।
चेहरे और हाथ पर जलने को न करें नजरअंदाज
डॉक्टर पंखुरी बताती हैं कि चेहरे, आंखों के आसपास और हाथ की उंगलियों पर पटाखे से जलना ज्यादा गंभीर हो सकता है। इन हिस्सों में चोट लगने से त्वचा के साथ शरीर की बनावट और काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। खासकर हाथ में चोट लगने पर समय पर इलाज नहीं मिलने से ऐसी परेशानी हो सकती है, जिसे बाद में ठीक करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सबसे पहले प्रभावित हिस्से को बहते पानी से ठंडा करें, फिर साफ गीले कपड़े में लपेटकर जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचें और विशेषज्ञ से इलाज कराएं।
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