Khabarworld24.com -केंद्र सरकार की नीतियों और उदासीन रवैये के खिलाफ किसान आंदोलन ने खनौरी बॉर्डर पर नया मोड़ ले लिया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 111 किसानों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है, जो बुधवार से जारी है। किसानों की यह प्रतिक्रिया डल्लेवाल के समर्थन में है, जो पिछले 51 दिनों से बिना भोजन के अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं।
डल्लेवाल, जो कि 70 वर्ष के हैं, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के संयोजक हैं और 26 नवंबर 2024 से पंजाब और हरियाणा के बीच खनौरी बॉर्डर पर अपनी मांगों के समर्थन में अनशन पर हैं। उनके बिगड़ते स्वास्थ्य पर किसानों और समर्थकों ने गहरी चिंता जताई है। आंदोलनकारी किसानों के अनुसार, इतने लंबे समय तक अनशन करने के कारण डल्लेवाल के कई अंगों के काम करना बंद करने का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया है।
आंदोलन के प्रमुख मुद्दे
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी किए गए बयानों के अनुसार, किसानों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी: किसान लंबे समय से एमएसपी को कानूनी रूप से लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम मिल सके।
- कर्ज माफी: किसानों पर बढ़ते कर्ज का बोझ भी इस आंदोलन का प्रमुख मुद्दा है। किसान चाहते हैं कि सरकार उन्हें कर्जमाफी की सुविधा प्रदान करे।
- कृषि कानूनों की समीक्षा: किसानों का कहना है कि कुछ प्रावधान अभी भी उनके हितों के खिलाफ हैं और उन्हें सरकार द्वारा पुनः समीक्षा की आवश्यकता है।
- किसानों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई बंद हो: पिछले आंदोलन में कई किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लिए जाएं और किसानों के खिलाफ होने वाली दमनात्मक कार्रवाई बंद हो।
किसानों का अनशन और समर्थन
आंदोलन को और अधिक मजबूती देते हुए, 111 किसानों का समूह डल्लेवाल के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठ गया है। यह अनशन सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से है ताकि उनकी मांगें जल्द से जल्द मानी जाएं।
आंदोलन का प्रभाव और आँकड़े
- 51 दिन का अनशन: यह अनशन 51 दिनों से चल रहा है और किसानों का दावा है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
- 111 किसानों का समर्थन: डल्लेवाल के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे किसानों की संख्या 111 है, जो लगातार बढ़ सकती है।
- स्वास्थ्य की स्थिति: डल्लेवाल की बिगड़ती स्थिति पर सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
- किसानों की संख्या: खनौरी बॉर्डर पर हजारों किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे इस आंदोलन को और बल मिल रहा है।
आंदोलन का भविष्य
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो देशभर में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ उनके हक के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी है।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द से जल्द इन मुद्दों का समाधान निकाले। किसान संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं।
निष्कर्ष
डल्लेवाल और 111 किसानों द्वारा किए गए आमरण अनशन ने खनौरी बॉर्डर पर तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। किसानों की मांगें लंबे समय से अटकी हुई हैं और सरकार की उदासीनता के कारण यह आंदोलन और अधिक उग्र होता जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार जल्द कोई समाधान निकालती है, या फिर यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

