कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर हर साल करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 29 अक्टूबर दिन गुरुवार को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस शुभ दिन पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए बड़े उत्साह से निर्जला व्रत करती हैं। इस दिन चंद्र देव के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता और गणेशजी की विशेष पूजा की जाती है। कभी आपने सोचा है कि करवा चौथ के दिन चंद्र देव की ही पूजा क्यों की जाती है, सूर्यदेव की क्यों नहीं, आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं…
ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को मन, शीतलता, शांति और प्रेम का कारक माना जाता है। यही वजह है कि करवा चौथ के दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनाए रखने के लिए शीतलता के प्रतीक चंद्र देव को अर्घ्य देती हैं। चंद्रमा को शाश्वत चक्र और पुनर्जन्म से भी जोड़कर देखा जाता है, इस वजह से स्त्रियां चंद्र देव को ‘अखंड सौभाग्य’ का प्रतीक मानकर पूजा करती हैं।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में से रोहिणी को सबसे ज्यादा प्रेम करते थे। करवा चौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग भी बनता है, जिस वजह से चंद्रमा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शीतलता के प्रतीक चंद्र देव की पूजा करने से पति की लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इसके उलट परंपराओं में जहां सूर्य देव को अत्यंत तेजवान और उग्र देवता माना जाता है जबकि चंद्रमा को शीतल और शांत माना जाता है, यही वजह है कि चंद्र देव की शीतल किरणें दांपत्य जीवन में कलह को दूर करती हैं, आपस में प्रेम बढ़ाती हैं और जीवन में स्थिरता लाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में योगेश्वर श्रीकृष्ण के रहने पर द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
बता दें कि करवा का अर्थ होता है मिट्टी का छोटा पात्र और चौथ का मतलब होता है चतुर्थी तिथि। यानी इस दिन करवे (मिट्टी के छोटे पात्र) में जल भरकर शीतलता के प्रतीक चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसी वजह से इस पर्व को करवा चौथ कहा जाता है।
करवा चौथ पूजन मुहूर्त 2026 – करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। पंचांग के मुताबिक, इस साल पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश, शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं। पूजा के समय करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।
सरगी खाने का शुभ समय – कल यानी करवा चौथ के दिन सूर्योदय लगभग सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होने की संभावना है। ऐसे में सरगी सूर्योदय से पहले खा लेनी चाहिए। कई परिवारों में इसे सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच खाने की परंपरा है। हालांकि, सरगी का समय और उसमें शामिल चीजें परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
करवा चौथ पर चांद निकलने का समय – करवा चौथ के दिन महिलाओं को चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है। पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट है। हालांकि, चांद निकलने का वास्तविक समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। चंद्रमा के दर्शन करने के बाद महिलाएं उन्हें अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
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