राधा अष्टमी का पर्व भक्ति और प्रेम से जुड़ा विशेष अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को प्रेम, त्याग और श्रीकृष्ण के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया गया है। माना जाता है कि कृष्ण नाम से पहले राधा का नाम लेने से भक्ति की पूर्णता होती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी पावन दिन राधा रानी ने धरती पर अवतार लिया था। इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। श्रद्धालु व्रत रखकर राधा-कृष्ण का ध्यान करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से प्रेम और भक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर, दिन शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 2 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 19 सितंबर, दिन शनिवार को 3 बजकर 28 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, दिन शनिवार को मनाया जाएगा।
राधा अष्टमी का महत्व
राधाष्टमी का व्रत और पूजन मनुष्य के जीवन में भक्ति, प्रेम और सौभाग्य की वृद्धि करता है और इसे करने वाला भक्त राधाकृष्ण के परम प्रेम का अधिकारी बनता है। व्रती को अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और भक्ति मार्ग पर स्थिरता और श्रीकृष्ण कृपा का आशीर्वाद मिलता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति राधा-राधा का नाम जपता है, कृष्णजी खुद-ब-खुद उसके पास चले आते हैं। राधा अष्टमी का व्रत करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और मधुरता बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
राधा अष्टमी व्रत की पूजा विधि
राधा अष्टमी पर श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी रखकर पीला कपड़ा बिछाएं और राधा रानी और श्रीकृष्ण की तस्वीर स्थापित करें। राधा रानी को चंदन, रोली, सिंदूर, फूल और सुगंधित सामग्री अर्पित करें। फिर खीर और अरबी की सब्जी का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें और राधा रानी के मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर प्रसाद बांटें और सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद दान-दक्षिणा कर व्रत का पारण किया जाता है। इसके अलावा सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार की वस्तुएं देना भी शुभ माना जाता है।
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