नई दिल्ली। बारिश की पहली बूंद के साथ ही भारत में एक अनचाहा मेहमान दस्तक देता है- मच्छर। ये मच्छर अपने साथ लाते हैं डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी, जो 2025 में 1.21 लाख मामलों में 131 मौतों की वजह बनी। इस बार मानसून में एक अच्छी खबर भी आई है। भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA) को मंजूरी दे दी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले किसी तरह की जांच कराने की जरूरत नहीं होगी। क्या यह डेंगू से पूरी तरह बचा पाएगी और कितने की मिलेगी…
डेंगू मच्छर की दुश्मन क्यूडेंगा वैक्सीन आखिर है क्या?
क्यूडेंगा जापान की दवा कंपनी टाकेडा ने बनाई है। यह एक लाइव एटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसका मतलब है कि इसमें डेंगू के वायरस को कमजोर करके शरीर में डाला जाता है। यह वायरस बीमारी पैदा नहीं करता है। शरीर का इम्यून सिस्टम इसे पहचानकर इसके खिलाफ एंटीबॉडी जरूर बना लेता है।
इस तरह जब कभी असली डेंगू का वायरस शरीर पर हमला करता है तो शरीर पहले से तैयार रहता है और बीमारी को गंभीर नहीं होने देता। सबसे बड़ी बात यह है कि यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रकारों (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से एक साथ सुरक्षा देती है। सबसे बड़ी खासियत इसे लगवाने के लिए कोई जांच नहीं होती है।
बिना जांच के वैक्सीन लगवाना कितनी बड़ी बात है?
अभी तक दुनिया में डेंगू की जो वैक्सीन थीं, उन्हें लगवाने से पहले यह जांच कराना जरूरी था कि मरीज को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। अगर किसी को पहले डेंगू नहीं हुआ था और वह वैक्सीन लेता था, तो उसे भविष्य में डेंगू होने पर बीमारी और गंभीर होने का खतरा रहता था, लेकिन क्यूडेंगा के साथ यह चिंता नहीं है।
कंपनी के बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल किए। इनमें 20,000 से ज्यादा बच्चों और वयस्कों को शामिल किया गया। ट्रायल से साबित हुआ कि यह वैक्सीन उन लोगों के लिए भी सुरक्षित है जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ। यही वजह है कि यह भारत जैसे देश के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, जहां बड़े पैमाने पर जांच कराना एक बड़ी चुनौती है।
यह वैक्सीन कैसे काम करेगी और किस तरह लगवाएं?
यह वैक्सीन 6 साल से लेकर 60 साल तक के लोगों को लगाई जा सकती है। इसकी दो डोज होती हैं, जिनके बीच 3 महीने का गैप रखना जरूरी है।
पहली डोज के बाद शरीर में वायरस के खिलाफ शुरुआती सुरक्षा तैयार हो जाती है।
दूसरी डोज इस सुरक्षा को लंबे समय के लिए मजबूत कर देती है।
ट्रायल्स के आंकड़ों के मुताबिक, वैक्सीन लेने के बाद डेंगू से अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 84% तक कम हो जाती है और संक्रमण का खतरा 61% तक घट जाता है।
क्यूडेंगा वैक्सीन की कीमत कितनी होगी और कब मिलेगी?
टाकेडा कंपनी ने अभी भारत में इस वैक्सीन की सटीक कीमत तय नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक इसकी एक डोज 4,000 से 5,000 रुपए के बीच हो सकती है। कंपनी जल्द ही इसे भारत के प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में मिलने लगेगी। सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में इसे कब और कैसे शामिल किया जाएगा, इस पर अभी फैसला होना बाकी है।
क्या यह वैक्सीन भारत में ही बनेगी?
नहीं. यह वैक्सीन जर्मनी से भारत में इम्पोर्ट होगी। इसके लिए टाकेडा ने Biological E. के साथ साझेदारी की है। टाकेडा की जर्मनी में सिनजेन स्थित फैसिलिटी और पार्टनर IDT Biologika GmbH में प्रोडक्शन किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि आने वाले समय में वैक्सीन की कीमत कम होगी और देश भर में इसकी उपलब्धता तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। इससे भारत सिर्फ अपनी जरूरत ही नहीं पूरी करेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को भी यह वैक्सीन सप्लाई कर सकता है।
तो क्या अब डेंगू से मौत नहीं होगी?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह वैक्सीन बेशक एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह सोचना गलत होगा कि डेंगू अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। वैक्सीन का मकसद डेंगू को गंभीर होने से रोकना और मृत्यु दर को कम करना है। यह कोई जादू की छड़ी नहीं है। डेंगू को पूरी तरह हराने के लिए मच्छरों पर कंट्रोल पाना सबसे ज्यादा जरूरी है। सही समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज भी उतना ही अहम है। हालांकि, यह वैक्सीन उस दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।
भारत में हर साल डेंगू का कितना कहर?
नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, 2023 में भारत में डेंगू के 2.89 लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे और लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई थी। 2024 में यह आंकड़ा और भयावह रहा, जब देश में 3.1 लाख से ज्यादा केस दर्ज किए गए और मरने वालों की संख्या 1,400 के पार चली गई। ये आंकड़े बताते हैं कि डेंगू भारत के लिए कितनी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।
इस मानसून में क्यूडेंगा वैक्सीन एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। यह देश के करोड़ों लोगों को डेंगू के डर से बचा सकती है और हर साल आने वाली उस आफत को रोक सकती है जो हजारों परिवारों को तोड़ देती है। यह भी याद रखना होगा कि वैक्सीन के साथ-साथ मच्छरों से बचाव, पानी जमा न होने देना और बीमारी के लक्षणों को गंभीरता से लेना उतना ही जरूरी रहेगा। तकनीक और जागरूकता दोनों साथ चलेंगी, तभी डेंगू को पूरी तरह हराया जा सकेगा।
डेंगू की रोकथाम के लिए लॉन्च हुए क्यूड़ेंगा वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिलने पर पटना के डॉक्टर खुश हुए। PMCH अधीक्षक और मशहूर फिजिशियन डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि यह एक रामबाण मिल गया है। जिस तरह हमने वैक्सीन के जरिए कोविड को हराया है, उसी तरह डेंगू को भी हरा देंगे। डेंगू से होने वाली मौतों में कमी आएगी और आंकड़े भी कम होंगे।
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