नई दिल्ली। बारिश का मौसम अपने साथ कई मौसमी फलों की सौगात लेकर आता है। इन्हीं में एक है जंगली नाशपाती, जो सालभर नहीं बल्कि केवल करीब 20 दिनों के लिए ही बाजार में नजर आती है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह फल औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला डाइटरी फाइबर पाया जाता है जो हमारी संपूर्ण पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में बेहद मददगार साबित होता है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से आंतों की आंतरिक सक्रियता काफी बढ़ जाती है जिससे पुरानी और गंभीर कब्ज की समस्या से हमेशा के लिए पूरी तरह राहत मिल जाती है।
खास बात यह है कि इसकी शेल्फ लाइफ बेहद कम होती है और तोड़ने के बाद यह महज तीन दिन तक ही ताजा रह पाती है। यही वजह है कि बाजार में इसकी उपलब्धता भी सीमित रहती है। इसमें विटामिन सी और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को बहुत तेजी से बढ़ाती है। जंगली नाशपाती वायरल संक्रमणों, मौसमी सर्दी-खांसी, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों में लाभदायक है।
फल व्यापारी सोनू राठौर ने बताया कि बारिश के मौसम में आने वाली नाशपाती की मांग हर साल अच्छी रहती है। स्वाद, रसदार गूदे और पोषक गुणों के कारण लोग इसे खूब पसंद करते हैं। मानसून शुरू होते ही बाजार में इसकी आवक बढ़ती है और ग्राहक बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी करते हैं। हालांकि यह मौसमी फल है, इसलिए बाजार में इसकी उपलब्धता केवल करीब 20 दिनों तक ही रहती है। इसके बाद आवक लगभग बंद हो जाती है, जिससे इसकी बिक्री और उपलब्धता दोनों कम हो जाती है।
नाशपाती में कैल्शियम, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दांतों और मसूड़ों को मजबूत बनाने के साथ पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मदद करते हैं। इसका स्वाद हल्का मीठा और हल्का कसैला होता है, जो इसे अन्य फलों से अलग बनाता है। इस फल में कैलोरी की मात्रा भी बेहद कम होती है जबकि पानी और प्राकृतिक फाइबर की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है। इसके सेवन के बाद पेट लंबे समय तक पूरी तरह भरा हुआ महसूस होता है जिससे असमय होने वाली भूख की इच्छा शांत होती है और अत्यधिक भोजन करने की आदत पर नियंत्रण रहता है।
नाशपाती बारिश के दौरान जल्दी खराब होने वाला फल है। नमी और अधिक पानी के संपर्क में आने से इसकी गुणवत्ता तेजी से प्रभावित होती है। सामान्य परिस्थितियों में यह फल केवल तीन दिन तक ही सुरक्षित रहता है। चौथे दिन से इसमें सड़न शुरू हो जाती है। इसी कारण व्यापारी इसकी सीमित मात्रा ही मंगाते हैं, ताकि ताजा फल ही ग्राहकों तक पहुंच सके।
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ। उमेश शर्मा बताते हैं कि नाशपाती की तासीर ठंडी होती है और इसमें मधुर व हल्के अम्लीय गुण पाए जाते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसके अलावा यह शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत देने में भी उपयोगी माना जाता है। जंगली नाशपाती का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है। इसमें मौजूद विशेष फाइबर ग्लूकोज के अवशोषण की प्रक्रिया को बहुत धीमा कर देते हैं। इसके कारण शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अचानक से नहीं बढ़ता और पूरी तरह से नियंत्रित स्थिति में रहता है।
Trending
- सरस्वती सायकल योजनातंर्गत सायकल वितरित
- सरगुजा पर्यटन को नई उड़ान देने की पहल : फेम ट्रिप के अंतर्गत टूर ऑपरेटर्स ने अम्बिकापुर के आतिथ्य और होटल सुविधाओं का लिया अनुभव
- नक्सल प्रभावित रहे सुकमा से खेल प्रतिभा की नई उड़ान
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में निभाई गजपति महाराजा की परंपरा : भगवान श्री जगन्नाथ का रथ खींचकर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की
- नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में ऐतिहासिक सफलता, केंद्र एवं राज्य सरकार का दृढ़ नेतृत्व सराहनीय – पुन्नूलाल मोहले
- नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल का पत्रकारों ने किया आत्मीय स्वागत
- नक्सल प्रभावित रहे सुकमा से खेल प्रतिभा की नई उड़ान
- सीएम हेल्पलाइन 1076 से हिमाद्री निराला को मिला उज्ज्वला गैस कनेक्शन


