नई दिल्ली। बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के बैरिया प्रखंड स्थित सरैया मन वन्य जीव स्थली अपने घने जंगलों और जामुन के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है। यहां बड़ी संख्या में जामुन के पेड़ मौजूद हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 850 हेक्टेयर में फैले इस जंगल में जामुन की दर्जनों किस्में पाई जाती हैं। हर साल सीजन के दौरान यहां बड़ी मात्रा में जामुन की हार्वेस्टिंग होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय ऐसा भी था, जब सरैया झील का पानी भी खास माना जाता था। बताया जाता है कि पके हुए जामुन सीधे झील में गिर जाते थे। इससे झील के पानी में भी जामुन के औषधीय गुण आ जाते थे। इसी कारण उस समय लोग इस पानी को भी खरीदकर ले जाते थे।
जामुन जितना ही फायदेमंद उसका बीज
बेतिया के आयुर्वेदाचार्य डॉ. भुवनेश पांडे, जो करीब चार दशक से आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, बताते हैं कि जामुन का फल जितना गुणकारी होता है, उसका बीज भी लगभग उतना ही औषधीय माना जाता है। लेकिन अधिकांश लोग इस बात से अनजान रहते हैं। वे जामुन का गूदा खाने के बाद उसकी गुठली फेंक देते हैं। डॉ. पांडे बताते हैं कि यदि जामुन के बीज को अच्छी तरह धोकर सुखा लिया जाए और उसका चूर्ण बनाकर उपयोग किया जाए, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पहुंचा सकता है।
चूर्ण बनाकर करें उपयोग
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को सिर या घुटनों में तेज जलन की समस्या हो, तो जामुन के बीज का लेप तैयार किया जा सकता है। इस लेप को कपड़े में रखकर प्रभावित स्थान पर लगाने से जलन में राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि जामुन के बीज का चूर्ण पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से कब्ज और मल त्याग से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।
ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रण में लाभकारी
डॉ. भुवनेश पांडे के अनुसार जामुन के बीजों में कार्मिनेटिव गुण पाए जाते हैं। ये पेट फूलने, अपच और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं। उनका कहना है कि जामुन के बीज का नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।
जामुन के बीजों में हाइपोटेंसिव गुण
भुवनेश पांडे ने बताया कि जामुन के बीजों में हाइपोटेंसिव गुण भी पाए जाते हैं। ये रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा इनमें जम्बोलिन और हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव वाले तत्व मौजूद होते हैं। ये रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। साथ ही शरीर में इंसुलिन के स्तर को बेहतर बनाने में भी इनकी भूमिका बताई जाती है। हालांकि, आयुर्वेदाचार्य सलाह देते हैं कि किसी भी रोग के उपचार के लिए जामुन के बीज का नियमित सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। इससे इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सकता है।
Trending
- 362 सहायक प्राध्यापक बने प्रोफेसर, 152 प्रोफ़ेसर हुए प्राचार्य पदोन्नति, शैक्षणिक नेतृत्व को मिली नई मजबूती
- नवपदस्थ सीईओ ने संभाली कमान, विभिन्न शाखाओं का किया सघन निरीक्षण
- मैनपाट में ‘नाशपाती’ की मिठास, एग्री-टूरिज्म का नया गढ़ बना छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट
- विश्व युवा कौशल विकास दिवस, कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम
- डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास को दी बधाई
- नवीन विधान सभा परिसर में ‘‘उत्कृष्टता अलंकरण समारोह‘‘ का गरिमामय आयोजन
- अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि लेखा 2025-26 प्रधान महालेखाकार की वेबसाइट पर उपलब्ध


