khabarworld24.com -शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में एक किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है। यह घटना उस स्थान के पास हुई है, जहां भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता जसबीर सिंह डल्लेवाल पिछले 45 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं। घटना के बाद से किसानों में रोष व्याप्त है और आंदोलन की स्थिति और गंभीर हो गई है।
आत्महत्या की घटना:
सूत्रों के अनुसार, किसान ने आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से तंग आकर आत्महत्या की। किसान का नाम जगदीश सिंह, उम्र 45 वर्ष, बताया जा रहा है, जो हरियाणा के करनाल जिले का निवासी था। जगदीश सिंह लंबे समय से आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे थे और अपनी समस्याओं को लेकर गंभीर मानसिक तनाव में थे।
आत्महत्या की यह घटना उस समय हुई जब किसान नेता डल्लेवाल और उनके समर्थक आमरण अनशन पर थे। 45 दिनों से जारी इस अनशन का उद्देश्य कृषि कानूनों के विरोध के साथ-साथ किसानों की अन्य प्रमुख मांगों को उठाना है। अनशन के बावजूद अभी तक सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिसके कारण किसानों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
गीजर फटने से झुलसा आंदोलनकारी:
उसी स्थान पर एक और गंभीर घटना हुई जब गीजर फटने से एक आंदोलनकारी गंभीर रूप से झुलस गया। घायल किसान का नाम सुरजीत सिंह, उम्र 30 वर्ष है, जो पंजाब के पटियाला जिले का निवासी है। घटना के तुरंत बाद उसे पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। गीजर फटने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन आंदोलन स्थल पर सुविधाओं की कमी और सर्द मौसम ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि:
यह आंदोलन बीकेयू नेता डल्लेवाल के नेतृत्व में शुरू हुआ था, जिसमें किसान संगठन कई मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं। इन मुद्दों में प्रमुख रूप से किसानों को उनकी फसलों के उचित दाम न मिलना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गारंटी कानून की मांग, कर्जमाफी और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया:
अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे आंदोलनकारी किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सरकार ने आंदोलन को समाप्त करने की अपील की है, लेकिन किसान संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और अनशन के माध्यम से सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
आकड़े:
- 45 दिनों का अनशन: जसबीर सिंह डल्लेवाल 45 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा है।
- 1500 से अधिक किसान शामिल: शंभू बॉर्डर पर जारी इस आंदोलन में लगभग 1500 किसान प्रतिदिन हिस्सा ले रहे हैं।
- 2000 से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके: रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 5 सालों में कृषि संकट के चलते देशभर में 2000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।
- 80% किसान कर्ज में डूबे: भारत में 80% से अधिक छोटे और मध्यम किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या हरियाणा और पंजाब के किसानों की है।
- 25% किसानों की आय में गिरावट: हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में पिछले 3 वर्षों में 25% किसानों की आय में गिरावट आई है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है।
निष्कर्ष:
यह घटना शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती है। किसानों की समस्याओं और सरकार के प्रति उनके असंतोष ने स्थिति को अत्यंत संवेदनशील बना दिया है। आत्महत्या और गीजर फटने जैसी घटनाओं से आंदोलन स्थल पर और भी तनावपूर्ण माहौल बन गया है। अब देखना यह है कि सरकार किस तरह से इन मुद्दों का समाधान करती है और आंदोलन को शांत करने के लिए कौन से कदम उठाती है।
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