khabarworld24.com -केरल जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो पर्यावरण के अनुकूल ‘ऑर्गेनिक’ पानी की बोतलों का उपयोग शुरू करेगा। यह पहल केरल सिंचाई अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के तहत एक स्टार्टअप द्वारा की जा रही है, जिसे ‘हिली एक्वा’ ब्रांड के अंतर्गत बाजार में उतारा जाएगा। इन नई बोतलों को “कम्पोस्टेबल बोतलें” कहा जा रहा है, जिसका अर्थ है कि ये बोतलें मिट्टी में जल्दी घुल जाएंगी, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।
बोतलें प्लास्टिक की जगह लेंगी
यह स्टार्टअप प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग को खत्म करने के उद्देश्य से इन कम्पोस्टेबल बोतलों का निर्माण कर रहा है। इस पहल को देश में अपनी तरह का पहला प्रयास माना जा रहा है। बोतलों का निर्माण पूरी तरह से प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल कच्चे माल से किया जाएगा, जो समय के साथ मिट्टी में आसानी से घुल जाएंगे। स्टार्टअप ने इन बोतलों के निर्माण और विपणन के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सभी आवश्यक प्रमाणपत्र भी प्राप्त किए हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन जनवरी 2025 के मध्य में इन बोतलों को औपचारिक रूप से लॉन्च करेंगे। इसके बाद यह पहल राज्यभर में पानी की ‘ऑर्गेनिक’ बोतलों के उपयोग की शुरुआत करेगी, जिससे केरल देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां पर्यावरण के अनुकूल पानी की बोतलों का उपयोग होगा।
प्लास्टिक प्रदूषण की चुनौती
भारत में प्लास्टिक प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रतिदिन लगभग 26,000 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 60% प्लास्टिक का पुनर्चक्रण किया जाता है। पानी की प्लास्टिक बोतलें भी इस समस्या का एक बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे में ‘ऑर्गेनिक’ पानी की बोतलों का उपयोग प्लास्टिक कचरे को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
कम्पोस्टेबल बोतलों के फायदे
इन कम्पोस्टेबल बोतलों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पर्यावरण के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। एक बार उपयोग करने के बाद ये बोतलें आसानी से मिट्टी में घुल जाएंगी और कोई भी हानिकारक प्रभाव नहीं छोड़ेंगी। इसके साथ ही, यह बोतलें प्लास्टिक के विकल्प के रूप में काम करेंगी, जो वर्तमान में पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
वैश्विक और घरेलू प्रमाणन
स्टार्टअप ने इन बोतलों के निर्माण के लिए आवश्यक घरेलू और वैश्विक प्रमाणपत्र हासिल किए हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ये बोतलें न केवल भारतीय मानकों पर खरी उतरेंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्य होंगी।
नयी पहल का महत्व
केरल की यह पहल न केवल राज्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देगी, बल्कि पूरे देश में प्लास्टिक के विकल्प के रूप में नई दिशा दिखाएगी। इस कदम से अन्य राज्य भी इस तरह की परियोजनाओं को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
आंकड़े और प्रभाव
- भारत में प्रतिदिन उत्पन्न प्लास्टिक कचरा: 26,000 टन।
- केरल में पानी की प्लास्टिक बोतलों का अनुमानित उपयोग: प्रतिवर्ष लाखों बोतलें।
- पुनर्चक्रण की दर: केवल 60% प्लास्टिक पुनर्चक्रण किया जाता है।
- ऑर्गेनिक बोतलों का लक्ष्य: प्लास्टिक बोतलों को पूरी तरह बदलना।
इस पहल के सफल होने पर, न केवल केरल बल्कि पूरे भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के प्रयासों को बल मिलेगा। उम्मीद की जा रही है कि इस नए उत्पाद का उपयोग बढ़ने से प्लास्टिक पर निर्भरता घटेगी और एक स्थायी भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

