भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा ने दुर्गम रास्तों और तेज बहाव वाले नालों को पार कर ग्रामीणों व छात्रों के साथ किया ध्वजारोहण
खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष कुमार-बीजापुर। स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बस्तर के सुदूर और कभी नक्सलवाद के प्रभाव वाले इलाकों में आजादी की नई तस्वीर देखने को मिली। बीजापुर जिले के विकासखंड बीजापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कैका के सुदूर गांव मोसला में आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज शान से फहराया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा विशेष रूप से गांव पहुंचे और ग्रामीणों एवं स्कूली छात्रों के साथ ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया।बताया गया कि बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के कुल 92 ऐसे गांवों में इस वर्ष पहली बार तिरंगा फहराया गया, जहां आजादी के बाद से अब तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर नहीं मिल सका था। मोसला गांव में हुआ ध्वजारोहण इसी बदलाव और नए बस्तर की तस्वीर को सामने लाने वाला ऐतिहासिक क्षण रहा।
चार दशक बाद नक्सलगढ़ के सुदूर गांव में पहुंचे भाजपा नेता मोसला पहुंचने के लिए राहुल योगराज टिकरिहा को बेहद दुर्गम रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र की सुनसान सड़कों, बारिश के कारण जगह-जगह बने दलदली कीचड़, उबड़-खाबड़ रास्तों और तेज बहाव वाले नालों को पार करते हुए वे मोटरसाइकिल से आगे बढ़े। कई स्थानों पर बाइक दलदल में फंसी तो कहीं पैदल चलकर रास्ता तय करना पड़ा। इसके बावजूद तिरंगा फहराने और ग्रामीणों के बीच स्वतंत्रता दिवस मनाने का संकल्प कायम रहा। करीब चार दशक बाद किसी भाजपा नेता का इस तरह नक्सलगढ़ के दुर्गम इलाके में पहुंचना ग्रामीणों के लिए भी उत्साह और विश्वास का बड़ा संदेश रहा। ग्रामीणों और छात्रों के साथ मनाया आजादी का पर्व
मोसला गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में ध्वजारोहण किया गया। तिरंगा फहराते ही पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों और बच्चों के चेहरों पर पहली बार अपने गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने की खुशी साफ दिखाई दी। इस अवसर पर राहुल योगराज टिकरिहा ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और शांति की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। दशकों से जिन इलाकों में तिरंगा पहुंचना मुश्किल था, वहां आज राष्ट्रध्वज पूरे सम्मान के साथ लहरा रहा है। यह बदलते बस्तर और मुख्यधारा से जुड़ते गांवों की तस्वीर है।
14 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी दी तिरंगे को सलामी
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण और भावुक तस्वीर उस समय सामने आई, जब मोसला गांव के ही 14 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होकर तिरंगे को सलामी दी। कभी हिंसा और भय के साये में रहे क्षेत्र में मुख्यधारा में लौट चुके लोगों का तिरंगे के सामने खड़ा होना शांति और बदलाव का महत्वपूर्ण संदेश माना गया। नक्सलमुक्त बस्तर के साथ गांव-गांव पहुंच रहा विकास
मोसला में पहली बार तिरंगा फहराया जाना केवल एक राष्ट्रीय पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते हालात का प्रतीक भी बना। नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकल रहे गांवों में अब सुरक्षा के साथ विकास की गतिविधियां भी तेजी से पहुंच रही हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ ग्रामीणों में शासन और व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ रहा है।
आज मोसला में लहराता तिरंगा यह संदेश देता नजर आया कि अब बस्तर में नक्सलवाद का अंधेरा पीछे छूट रहा है और गांव-गांव विकास, शांति और विश्वास की नई धारा पहुंच रही है। स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार तिरंगे के नीचे खड़े ग्रामीणों और बच्चों के लिए यह दिन वास्तव में लंबे इंतजार के बाद मिली आजादी का उत्सव बन गया।


