नई दिल्ली। मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन पेट से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ा देता है। इस दौरान दूषित पानी, नमी और बैक्टीरिया के कारण गैस, अपच, ब्लोटिंग और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्रोबायोटिक फूड्स आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे पाचन बेहतर रहता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। आइए जानते हैं ऐसे 6 प्रोबायोटिक फूड्स के बारे में, जिन्हें मानसून की डाइट में शामिल करके आप अपनी गट हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं।
मानसून में क्यों बढ़ जाती हैं पेट की समस्याएं?
बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है। इस दौरान बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और खराब भोजन की वजह से गैस, अपच, ब्लोटिंग, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसलिए इस मौसम में ऐसी चीजें खाना जरूरी है, जो पेट को स्वस्थ रखें और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाएं।
बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल की हेड ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स एडविना राज के मुताबिक, प्रोबायोटिक फूड्स आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे पाचन बेहतर होता है और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।
1. ताजा दही-
घर का बना ताजा दही प्रोबायोटिक्स का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया आंतों को स्वस्थ रखते हैं। रोजाना एक कटोरी ताजा दही खाने से पाचन बेहतर रहता है और पेट हल्का महसूस होता है।
2. छाछ-
दही से बनी ताजी छाछ गर्मी और उमस दोनों से राहत देती है। यह पेट को ठंडक पहुंचाती है और भोजन पचाने में मदद करती है। कोशिश करें कि छाछ में बहुत ज्यादा नमक न मिलाएं। चाहें तो इसमें भुना जीरा और पुदीना डालकर पी सकते हैं।
3. केफिर-
केफिर एक फर्मेंटेड मिल्क ड्रिंक है, जिसमें कई तरह के अच्छे बैक्टीरिया और यीस्ट पाए जाते हैं। यह गट माइक्रोबायोम को संतुलित रखने में मदद करता है। अगर आपके आसपास आसानी से उपलब्ध हो, तो इसे भी अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।
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4. इडली और डोसा-
इडली और डोसा का घोल प्राकृतिक तरीके से फर्मेंट किया जाता है। यही कारण है कि इनमें लाभदायक सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं। ये हल्के होते हैं, आसानी से पच जाते हैं और मानसून के मौसम में नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं।
5. फर्मेंटेड सब्जियां-
घर पर साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए तैयार की गई फर्मेंटेड गाजर, खीरा या दूसरी सब्जियां भी प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत हैं। हालांकि इन्हें हमेशा स्वच्छ तरीके से तैयार करें, ताकि किसी तरह का संक्रमण न हो।
6. कांजी-
काली गाजर या चुकंदर से बनाई जाने वाली पारंपरिक कांजी प्राकृतिक प्रोबायोटिक ड्रिंक है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है।
इन बातों का भी रखें ध्यान-
सिर्फ प्रोबायोटिक फूड्स खाना ही काफी नहीं है। इनके साथ फाइबर से भरपूर फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालें भी खाएं, क्योंकि ये अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं। हमेशा साफ और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। बासी, खुले में रखा या सड़क किनारे का भोजन खाने से बचें और खाने से पहले हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
अगर आपको बार-बार पेट दर्द, दस्त, तेज गैस, ब्लोटिंग या कोई पुरानी पाचन संबंधी बीमारी है, तो अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह जरूर लें। सही खानपान और अच्छी फूड हाइजीन अपनाकर आप पूरे मानसून में अपनी गट हेल्थ और इम्यूनिटी दोनों को बेहतर बनाए रख सकते हैं।
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